इंसान वही है जो परपीडा को समझकर इंसानियत के लिए कार्य करे गुणरंजना श्रीजी

धर्म

इंसान वही है जो परपीडा को समझकर इंसानियत के लिए कार्य करे गुणरंजना श्रीजी
रामगंजमंडी
:- पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के का छठा दिन शहर के बाजार नं. 3 मे स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में साध्वी गुणरंजना श्रीजी मा.सा, की पावन निश्रा में भक्ति आराधना के साथ हुआ। साध्वी श्री के द्वारा कल्पसूत्र के माध्यम से भगवान महावीर के 27 भवो, एवम भगवान पार्श्वनाथ के 10 भवो का जीवन वर्णन बताया गया उन्होंने कहा की आज का इंसान ज्ञानियों एवम तपस्वीयो की परीक्षा लेने को तैयार हो जाता है – जबकि यह कार्य परमात्मा का है। परमात्मा के कार्य को भी इंसान करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि साधु ओर साध्वीया चलते फिरते जंगम तीर्थ होते है। कल्याण का सिर्फ एक रास्ता है ओर वो है संयम-जिसने अपने मन को साथ लिया उसने सब जीत लिया शरीर,पद, ओर सत्ता का प्रमोशन तो बहुत कर लिया- साध्वी श्री ने आत्मा के प्रमोशन का कार्य सभी को शुरू करने की सीख दी- भूल हो जाने के बाद प्रायश्चित करना जरूरी है।
आगे बोलते हुए कहा कि इंसान वही है जो पर पीडा,समझ ओर इंसानियत के कार्य करे। अहंकार पर बोलते हुए साध्वी जी ने कहा 50 हजार शिष्यों के के गुरु होते हुए भी गोतम स्वामी भगवान महावीर की देशना एक अबोध बालक की तरह ही सुनते थे। नदियो मे डूबकिया लगा कर तन को ठंडा तो खूब कर लिया लेकिन मन को ठंडा करने का कार्य पर्यूषण पर्व करता है। पर्युषण पर्व पुण्य उदय का कार्य करता है।साध्वी श्री जी ने कहा कि जैन धर्म चमत्कार का नही नमस्कार का धर्म है। जैन धर्म के मूल सिद्धान्त किसी भी जीव को दुखी नही करना और किसी पर दुख के बीजनही बोना बताया- भगवान महावीर ने जितने भी अपने ऊपर कष्ट आए उन्हें करुणा भाव से स्वीकार किये-उपस्थित सभी लोगो से साध्वी जी ने कहा की भगवान महावीर को नजरों में फिट कर लो या महावीर की नजरो मे फिट बन जाओ।
जानकारी देते हुए सरक्षक राजकुमार पारख ( लिटील भाई) ने बताया की प्रवचन उपरान्त प्रश्न उत्तर किये जाते हैं। उत्तर देने वालो को पुरस्कृत भी किया जाता है। इसी क्रम में संघ पूजा भी हुई।- रात्रि को भजन संध्या एवम भक्ति का कार्यक्रम हुआ भजन संध्या में भजन सम्राट मनीष सोनी भीलवाडा एवम कोकिला कन्ठ हेमा ओर प्रभा मन्दसोर ने शानदार भजन प्रस्तुत किये।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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