अहंकार ही अहंकार का बीज है आचार्य विनम्र सागर महाराज
सनावद–:
आचार्य श्री 108 विनम्र सागर महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी का रसपान करवाते हुवे कहा की अहंकार ही अहंकार का बीज है। कभी भी मत सोचना की कभी भी कितने लोग तुम्हारे साथ हों जाएं कितना भी अच्छा व्यक्तिव तुम्हारा बन जाय फिर भी किसी को कमजोर मत समझना मद अकेले में होता हे घमंड सब के बीच में होता हे मद को जड़ सहित खत्म करो घमंड अपने आप समाप्त हों जायेगा।
समाज प्रवक्ता सन्मति काका ने बताया की आचार्य श्री ने कहा कि जब कोई श्रावक यह भाव करता है कि मैंने अपने खाने के लिए आहार तैयार किया है, उसमें से मैं भक्ति के लिए जैन मुनि राज को आहार दूं तो यह भाव बनने मात्र से ही उसे अनंत पुण्य का अर्जन हो जाता है। जब वह भक्ति भाव से मुनि राज या आर्यिका माताजी को आहार देता है तो उसका मानव जीवन सार्थक हो जाता है।
इसी क्रम में मंगलवार को चतुर्विध संघ को मंदिर के हॉल में आहार दान देने का सौभाग्य मनीष कुमार आशीष कुमार इंदरचंद चौधरी परिवार सनावद को प्राप्त हुआ। दान में श्रेष्ठ आहार दान है। आहार दान का कार्य सभी श्रावकों को करना चाहिए। कारण दान के माध्यम से महान पुण्य की प्राप्ति होती है। नवधाभक्ति पूर्वक आहार दान की प्रक्रिया से दान देना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
