परम पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर महाराज का बूंदी के गोठडा में हुआ मंगल प्रवेश ऊंचाई प्राप्त करने के लिए ताना पड़ता है सरलता से जो मिलता है उसकी कीमत कम होती है मुनि श्री
बूंदी का गोठड़ा । आचार्य श्री 108विशुद्ध सागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री108 आदित्य सागर मुनि अप्रमित सागर मुनि सहज सागर क्षल्लक श्रेयांश सागर महाराज ससंघ का सोमवार को बूंदी का गोठड़ा में भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
धर्मावलंबियों ने कस्बे से बाहर पेट्रोल पंप पर पहुंचकर मुनि संघ की अगवानी की पाद प्रक्षालन किया एवं आरती उतारी तत्पश्चात श्रद्धालु ने मुनि संघ को जुलूस के रूप में बैंड बाजों के साथ नगर भ्रमण कराते हुए कस्बे में स्थित दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर लाया गया जहां पर मुनि संघ ने श्री जी के दर्शन किये। जगह श्रद्धालुओं ने मुनि संघ की अगवानी मे जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए रंगोलिया सजाई एवं आरती की।


श्री पार्श्वनाथ दिगंबर मांगलिक भवन में मुनिश्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि ऊंचाई प्राप्त करने के लिए तपना पड़ता है सरलता से जो मिलता है उसकी कीमत कम होती है मिलता वही है जो आपके भाग में है जबकि आप इच्छाएं बड़ी-बड़ी कर लेते हैं यदि आपकी अपेक्षाएं पूरी नहीं होती है तो आपकी श्रद्धा गुरु एवं भगवान के प्रति टूट जाती है जो सच्ची श्रद्धा रखता है वही सच्चा भक्त होता है भक्त कभी गुरु से एवं भगवान से अपेक्षाएं नहीं रखता बल्कि गुरु एवं भगवान के प्रति श्रद्धा बनाकर रखता है।
पुरुषार्थ उत्तम हो तभी गुरु का आशीर्वाद मिलता है कभी भी गुरु से ज्यादा अपेक्षाएं मत करना अपेक्षा पूरी ना हो तो काहे का गुरु एवं काहे का भगवान, बिना श्रद्धा के आप खाली डिब्बे के समान है बुरे लोगों से समाज का बहुत बड़ा नुकसान होता है जबकि बुरे लोग समाज में नाम मात्र के होते हैं जो दिल से उतर गया वो उतर गया फिर गुरु वापस मुड़कर नहीं देखते हैं बिना भाग्य के कुछ नहीं मिलता


गुरुओं के सामने भक्तों की आज्ञा नहीं चलती सच्चा भक्त हमेशा गुरुओं की आज्ञा का पालन करते हैं तो गुरु भी भक्तों के लिए कुछ भी त्याग करने को तैयार रहते हैं फिर मार्ग की दूरी नहीं नापी जाती है।
विमल जैन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312



