भावना योग कोई कल्पना नहीं प्रमाणित जीवन साधना है प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
“में सहज रहुं,शांत रहूं, स्वस्थ रहूं सकारात्मक रहूं यही भावनायोग की मूल ध्वनी है,यही आत्मरुपांतरण का बीज है”भावना योग कोई कल्पना नहीं,प्रमाणित जीवन साधना है” उपरोक्त उदगार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने अवधपुरी स्थित श्री विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा,“धर्म केवल एक क्रिया नहीं, जीवंत प्रक्रिया है,यह जड़ प्रार्थना नहीं, सजीव आत्म-संवाद ही भावना योग का मूल है।”उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि जैसे जल की धारा जिस स्थान से निकल जाती है तो दूसरी बार पानी डालो तो उसी स्थान से जाता है उसी प्रकार स्वतः बार-बार सकारात्मक वाक्य दोहराने से मस्तिष्क में नया रास्ता बन जाता है, और यही भावनायोग का प्रयोग व्यक्ति को भीतर से रूपांतरित करता है, मुनि श्री ने भावनायोग पर प्रकाशित “आत्म साक्षात्कार का मार्ग” पुस्तक के दूसरे अध्याय का गहन अध्ययन करने की प्रेरणा दी, जिसमें प्रार्थना के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है,उन्होंने कहा कि“भावना योग केवल जैनों के लिए नहीं, जन-जन के लिए है। इसे जन आंदोलन का विषय बनाना चाहिए,तथा प्रत्येक साधक को इसका ध्वजवाहक बनना चाहिए।”

मुनि श्री ने कहा कि “भावना योग” केवल एक साधना ही नहीं, बल्कि आत्म-विज्ञान और मनोविज्ञान का संगम है, जिसे यदि सही दृष्टिकोण और वैज्ञानिक आधार से अपनाया जाए तो यह जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल सकता है। इस अवसर पर प्रसिद्ध न्यूरोलाजिस्ट डॉ. सचिन जैन द्वारा भावना योग पर आलेख प्रस्तुत किया गया।




प्रवक्ता अविनाश जैन ने उपरोक्त जानकारी देते हुये बताया “भावनायोग” का यह शिविर आगामी 12 जून तक लगातार चलेगा प्रातः5:30 से प्रारंभ शिविर में प्रशिक्षणार्थियों द्वारा भाग लिया जा रहा है आगामी सत्रों में डा. सचिन जैन द्वारा भावनायोग और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर पांवर पांइट प्रस्तुती की जाएगी इसका लाईव प्रसारण प्रमाणिक ऐप तथा पारस चैनल पर चल रहा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
