ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी का दीक्षा से पूर्व हुआ केशलोच आचार्य श्री वर्धमान के कर कमलो से 107 वी दीक्षा संपन्न होगी

धर्म

ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी का दीक्षा से पूर्व हुआ केशलोच आचार्य श्री वर्धमान के कर कमलो से 107 वी दीक्षा संपन्न होगी
उदयपुर
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के कर कमलो से उदयपुर के हुमड भवन में आज दीक्षार्थी मंजू दीदी की दीक्षा संपन्न होने जा रही है।

 

 

आज की प्रातःबेला में समस्त आर्यिका माताजी एवम अन्य जनों की उपस्थिति में पूज्य दीदी का कैशलोच संपन्न हुआ केशलोच एक साधना है। बिना किसी उपकरण के अपने हाथों से केशो का उखाड़ना हर किसी के बस की बात नहीं है। जो भी इन क्षणों को देख लेता है वह करुणा से भर जाता है। हमें हल्की सी चुभन महसूस होते ही या हल्का सा दर्द महसूस होते ही हम बेचैन हो जाते हैं। लेकिन दीक्षा लेने वाले इन पलो से विचलित नहीं होते हैं और अपने साधना के मार्ग पर बढ़ते चले जाते हैं। ऐसे ही आज प्रातः है की बेला में देखने को उदयपुर में मिले। पूज्य आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज द्वारा आज अपने जीवन की 107वीं दीक्षा दी जा रही है। आचार्य श्री द्वारा उदयपुर में यह चौथी दीक्षा होगी।


वात्सल्य भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया से मिली जानकारी अनुसार सुबह 5:00 बजे यह क्रिया शुरू हुई। मौजूद भक्तजन भजन गाते हुए इन पलों के साक्षी बने। गुरुवार की बेला में दीक्षार्थी की गोद भराई की गई है। आज दीदी की दीक्षा के बाद इनका नया नामकरण हो जाएगा और अब संसार मार्ग से इनका कोई नाता नहीं रहेगा। 65 वर्षीय मंजू दीदी विगत 39
वर्षो से संघ में रहकर धर्म साधना रत रही।


गुरुवार की अनुपम बेला में पूज्य महाराज श्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि संसार में कर्म बंधन सबसे बड़ा दुखदाई होता है और इसके कारण ही व्यक्ति में राग द्वेष बढ़ता है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि हम कितना भी चिंतवन करले लेकिन उसके बाद भी हम संसार के बंधनों में बंधे ही रहेंगे। हमारे जीवन में कई शंकाएं रहती हैं और हम अपने जीवन में अनुकूल कार्य को संबंध करने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन हम यह नहीं सोच पाते हैं कि हमारे कार्य की सिद्धि जिस भी होती है उसे कितना सर्वनाश हो सकता है।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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