आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संध का बिजोलिया से जहाजपुर के लिए मंगल विहार -संसार का प्रत्येक प्राणी शांति प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील है – आचार्य वर्धमान सागर जी
निवाई – बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज के शिष्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिसकी पुण्य की जड़ मजबूत है उसका भगवान भी बुरा करने में सक्षम नहीं है तुम उसका बुरा सोचोगे हो सकता है उसका कुछ ना बिगड़े और तुम्हारा ही बुरा हो जाए। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि भक्त वह होता है जो समर्पित होता है जिसका सर्वस्व प्रभु के चरणों में न्योछावर हो जाता है जो स्वयं को भूल जाता है जिसे प्रभु के चरणों में अनुराग होता है। उन्होंने कहा कि भगवान न किसी से प्रसन्न होते हैं और न किसी से रुष्ट होते है। जो भी उनके चरणों में आता है, भक्ति रूपी नोका पर आसीन होता है। वह स्वयं संसार सागर से पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि संसार का प्रत्येक प्राणी शांति प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील है। जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला एवं सुनील भाणजा एवं राकेश संधी ने बताया कि आचार्य श्री का मंगल विहार 5 जून को सुबह बिजोलिया से जहाजपुर के लिए हो गया है। आचार्य श्री संध सहित 36 पिच्छिका के साथ बिजोलिया पार्श्वनाथ से चंवलेश्वर पार्श्वनाथ होते हुए जहाजपुर आयेंगे। उनके मंगल विहार की व्यवस्थाओं में देश भर के श्रद्धालु गण जुटे हुए हैं। – विमल पाटनी निवाई से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929737312
