हमेशा प्रिय एवं मधुर वचन बोलना चाहिए वचनों में दरिद्रता नहीं होना चाहिए विनोद जैन आचार्य

धर्म

हमेशा प्रिय एवं मधुर वचन बोलना चाहिए वचनों में दरिद्रता नहीं होना चाहिए विनोद जैन आचार्य

   रामगंजमंडी 

विगत 17 मई से नगर में मुकमाटी अर्थ ज्ञान शिविर एवं धार्मिक शिक्षण शिविर चल रहा है। श्री प्रशांत जैन आचार्य आकाश जैन आचार्य के द्वारा छोटे-छोटे बच्चों को तीर्थंकरों के नाम चिन्ह के साथ बच्चों को कर्म सिद्धांत आदि का पाठ पढ़ाया श्री मनोज जैन द्वारा बच्चों को एक प्रार्थना इतनी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास कमजोर ना होना के द्वारा बच्चों को सकारात्मक संदेश प्रदान किया गया। 

 

 

 गुरुवार की प्रातः बेला में शिविर के अंतर्गत बोराव ग्राम के सरपंच जो कि जैन समाज के विशिष्ट व्यक्ति है जो राजस्थान के सबसे युवा सरपंच में से एक हैं उन्होंने अपना जन्मदिन शिविर को समर्पित किया एवं श्री जी का अभिषेक शांति धारा करने का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ उनकी ओर से सभी शिविरार्थियों का अल्पाहार रखा गया इस अवसर पर उनका स्वागत अभिनंदन किया गया। इसके बाद उनके द्वारा गौशाला में गोवंश को गुड़ चारा खिलाया गया और जन्मदिन रोसली रोड़ स्थित गौशाला में मनाया गया ।

इधर शिविर में प्रश्नोत्तर रत्नमालिका का अध्ययन कराते हुए श्री विनोद जैन आचार्य ने कहा कि सुख को प्रदान करने वाली मैत्री होती है। सभी दुखों के विनाश के लिए समस्त परिग्रह का त्याग करना जरूरी है। उन्होंने दुख के विषय में कहा कि भीतरी परिग्रह भी दुख को देने वाला है। परिग्रह दुख का कारण है जितना अधिक परिग्रह का भार होगा उतना अधिक दुख होगा और यह जितना कम होगा दुख का अनुभव कम कराएगा।

उन्होंने कहा व्यक्ति जो कार्य नहीं करना है उनमें लगा है वह व्यक्ति अंधा है। जो व्यक्ति हित की बात नहीं सुनता है वह व्यक्ति बहरा होता है इसीलिए बहरे मत बनो हित की बात दो कान लगाकर नहीं चार कान लगा कर सुनो। हम अहित की बात जल्दी सुनते

 

 

 उन्होंने मूक व्यक्ति के विषय में कहा मूक व्यक्ति वह है जो समय पर मीठा नहीं बोलता। प्रिय वाक्य बोलने से ही सभी जीव संतुष्ट होंगे एक लोकोक्ति बताते हुए कहा कि ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए।

औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय। वचनों में वाणी में दरिद्रता नहीं होनी चाहिए। 

 

 

उन्होंने कहा कि दिन-रात संसार की असारता का चिंतन करना चाहिए हमेशा करुणा, सज्जनता मैत्री को अपनाना चाहिए उन्होंने कहा दुर्जन व्यक्ति के विषय में मत सोचो उसे समझाना सर्प के विष के समान है दूसरे के धन पर पत्थर जैसा व्यवहार करो यह भावना करो की यह मेरा नहीं है।

 

   विद्या के विषय में कहा कि विद्या के अभ्यास में प्रयास करते रहना चाहिए प्रतिदिन स्वाध्याय पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए उन्होंने दान करने की भी सीख सभी को दी । कोई भी निंदनीय कार्य करें छुपा कर नहीं करें यदि वह निंदनीय कार्य करते हैं और छुपाकर तो वह आपको जीवन भर चुभता रहेगा।

 

    अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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