-सिद्धचक्र महामंडल विधान केशवरायपाटन में ध्वजारोहण से हुआ शुभारंभ दुर्लभ मनुष्य जीवन को भोग विलास की जगह आत्मकल्याण में लगाए स्वास्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र केशवरायपाटन में आर्यिका रत्न 105 स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में सोमवार से पांच दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान शुरू हुआ।
विधानाचार्य गजेंद्र शास्त्री ने मंत्रोच्चारण और ध्वजारोहण कर अनुष्ठान की शुरुआत कराई। विधान की बेला में आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने प्रवचन में कहा कि दुर्लभ मनुष्य जीवन का हर क्षण अमूल्य है, इसे भोग-विलास की जगह आत्मकल्याण और धर्म मार्ग में लगाना चाहिए। समय का भरोसा नहीं है, इसलिए समाधि मरण के लिए तैयारी अभी से शुरू करनी चाहिए।

माताजी ने कहा पण्डित दौलत राम जी छहढाला ग्रन्थ में कह रहे हैं कि मनुष्य पर्याय एक दाव है! जैसे कोई क्रिकेट का खिलाडी क्रीज पर खड़ा है और 1 बॉल पर छः रन चाहिए हैं अब खिलाडी पूरी तैयारी कर रहा है कि जरा भी चूक हुई और दाव गया! जैसे ही बोल आयी और पूरी शक्ति संतुलन से शॉट लगाया और छः रन पर भेज दिया।


ऐसे ही मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों में से मनुष्य योनि प्राप्त करना है! 84 लाख योनियों में हो पाया है क्योंकि उसके लिए हमने बहुत पुण्य एकत्रित किया होगा।


उन्होंने कहा एक गरीब इंसान को रास्ते में चिंतामणि रत्न मिला! उसको ज्ञान नहीं था कि यह बहुमूल्य है उसको तो वह देखने में अच्छा लगा।
उसने वह चिंतामणि रत्न अपने प्रिय गधे को गले में पहना दिया! क्योंकि गधा उसको बड़ा प्रिय था, वह उससे माल आदि ढोता था उसकी आजीविका का साधन था।
एक दिन उस रत्न पर एक जौहरी की नज़र पड गयी! जौहरी ने उससे मौलभाव किया लेकिन 50 रूपये में उस इंसान ने नहीं बेचा। अगले दिन एक और सेठ ने आकर उसको 200 रूपये में खरीद लिया, पहले जौहरी ने उस इंसान से कहा की तुमने लाखों की चीज को 200 रूपये में बेच दिया! इंसान ने कहा मैं तो अज्ञानी था मैं नहीं जानता था इसकी कीमत क्या होगा! पर आज हमें तो ज्ञान है की मनुष्य पर्याय कितनी मूल्यवान है!
मनुष्य जीवन को चाहे भोगों में खो दो या इसको धर्म मार्ग में लगाकर आत्मा का कल्याण कर लो निर्णय आप के हाथ में है! समाधि पूर्वक मरण चाहते हो तो आज से ही तैयारी कर लीजिये क्या पता फिर समय मिले ना मिले! जैसे ट्रैन पकड़ने के लिए समय से पूर्व घर से निकलना पड़ता है, वैसे ही समय रहते इस पर्याय के सदुपयोग में लग जाओ ऐसा ना हो की फिर देर हो जाये क्योंकि एक पल की भी भरोसा नहीं है कब मृत्यु आ जाये और हमारा जीवन बिना कुछ अच्छे कर्म किये व्यर्थ चला जाये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
