आचार्य कल्प श्रुतसागर महाराज का समाधि दिवस पर होंगे विभिन्न कार्यक्रम
श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन पंचायत और सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से 17 मई, शनिवार को आचार्य श्रुतसागर महाराज का 38वां समाधि दिवस मनाया जाएगा। सिटी रोड स्थित जैन भवन में आर्यिका 105 श्रुतमती माताजी व आर्यिका सुबोधमती माताजी ससंघ के सानिन्ध्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रातः 6 बजे श्रीजी के पंचामृत अभिषेक व वृहद शांतिधारा, प्रातः 7 बजे श्री शांतिनाथ मंडल विधान होगा। विधानाचार्य मनीष गोधा फागी होंगे।
दोपहर 1 बजे चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट और श्रुतसागर महाराज पूजन व विनयांजलि सभा और आरती होगी। प्रचार मंत्री गौरव पाटनी ने बताया कि गुरुवर श्रुतसागरजी आधारित प्रश्नमंच में सही जवाब देने वालों को रजत के सिक्के से पुरस्कृत किया जाएगा। कार्यक्रम के लिए हाउसिंग बोर्ड मंदिर, इन्दानगर मंदिर और मुनिसुव्रतनाथ मंदिर पर वाहन सुविधा उपलब्ध रहेगी।

संक्षिप्त जीवन परिचय
परम पूज्य 108आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज
जन्म का नाम : श्री फागुलाल
जन्म तिथि : फागुन माह अमावस्या विक्रम संवत 1962
जन्म स्थान : कोलकत्ता
पिता का नाम: श्री छोगा लाल जी
माता का नाम: श्रीमती गज्जो देवी
विवाह : श्रीमती बसंती देवी
पुत्र एवं पुत्री : 3पुत्र एवं 3 पुत्री (एक पुत्री वर्तमान में श्रुतमती माताजी)

ब्रह्मचर्य व्रत : आचार्य श्री शांति सागर जी परम्परा के श्री वीर सागर जी गुरुदेव का ईसरी में विक्रम संवत 2009 में चातुर्मास हुआ तब आपने शुद्ध जल का व्रत लिया |
7प्रतिमा का नियम :
टौडारायसिह में गुरुदेव श्री वीर सागर जी से विक्रम संवत 2011 में 7प्रतिमा का नियम लिया।
क्षुल्लक दीक्षा : कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी, संवत 2011 (सन 1954) को टौडाराय सिह में मुनि श्री वीर सागर जी से क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण कर श्री चिदानंद सागर नामकरण हुआ तब आपकी सबसे छोटी पुत्री सुशीला जी की उम्र मात्र 7 वर्ष की थी ।
मुनि दीक्षा : जयपुर में भादव सुदी तीज संवत 2014 (सन 1957) को दीक्षा गुरु आचार्य श्री वीर सागर जी ने मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि श्री श्रुतसागर नामकरण किया दशमी, अजमेर (राजस्थान) |
सल्लेखना व्रत :
12 वर्ष का सल्लेखना नियम आचार्य श्री धर्म सागर जी से (27 अप्रैल 1976) वैशाख कृष्णा तेरस को 12 वर्ष का सल्लेखना व्रत लिया वैशाख शुक्ला तीज, (19 अप्रैल 1988) को अनाज का त्याग किया, 3दिन बाद (22 अप्रैल1988 ) को दूध का त्याग किया, वैशाख कृष्णा ग्यारस (27 अप्रैल 1988) को अतिशय क्षेत्र लूणवा में चारों प्रकार के आहार का त्याग किया | यम सल्लेखना के 9 वें दिन ज्येष्ठ कृष्णा पंचमी (6 मई 1988) को प्रातः 9.15 को आपकी समाधि हुई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



