मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर महाराज ने वृक्ष के नीचे बैठकर की साधना निर्मोही निष्प्रहता का जीवंत प्रमाण दिगंबर संत
रानीताल मझौली
सचमुच दिगंबर संत की साधना के विषय में जितना कहा जाए कम होता है। वे निर्मोही निष्प्रही संत धरती ओढन है आकाश बिछौना है। ऐसे हमारे दिगंबर संत होते हैं जो राग रंग से परे होते हैं। गर्मी हो सर्दी हो बरसात हो बस परिषह को सहते है। समता रस को यह पीते हैं। और जग से यह कुछ नहीं कहते है। यह त्याग नदी बनकर बहते हैं।
इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 15 मई की रात्रि बेला में देखने को मिला 15 मई को संध्या की बेला में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज ने मंझौली से मंगल विहार किया।

मंगल विहार के दौरान रात्रि विश्राम महाराज श्री ने एक विद्यालय में किया तब ऐसा दृश्य देखने को मिला जो दिगंबर संत की साधना का जीवंत प्रमाण परिलक्षित कर गया।


जी हा निर्यापक मुनि श्री 108सुधासागर जी महाराज का विश्राम रानीताल (मझौली) के एक सरकारी स्कूल परिसर में हुआ। गुरुदेव एक विशाल वृक्ष के नीचे विराज गए और किसी ने उनका छायाचित्र ले लिया और प्रसारित कर दिया।

शायद ही इतने वर्षों में किसी ने शायद इस वृक्ष की इतनी चर्चा की होगी जितनी चर्चा महज मुनि श्री के विराजमान होने से हो गयी।

कहने का तात्पर्य यह हैं कि सन्तो का सानिध्य पाकर अपने जीवन को खुशहाल बनाना नही पड़ता स्वयं बन जाता हैं प्रसिद्ध भी हो जाते हैं ।अतः जब भी जहां भी जैसे भी श्रेष्ठ सन्त के दर्शन हो उनका सानिध्य लाभ लेते रहना चाहिए।
सचमुच दिगंबर संत इस जग के प्राण हैं। पंचम युग में ऐसी उत्कृष्ट साधना देख पाना किसी दुर्लभता से कम नहीं है। मुनि श्री को गुरु से नाम मिला सुधासागर महाराज वे हम सभी को सुधा अमृत का पान करा रहे हैं। धर्म की ध्वजा को पुलकित कर रहे हैं। ऐसे व्यक्तित्व की अनुमोदना करनी चाहिए जिन्होंने इस पावन छायाचित्र को कैद किया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

