अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज के दर्शन हेतु सुप्रसिद्ध रामकथा वाचक मुरारी बापू पहुंचे इंडिया नहीं भारत बोलो प्रसन्न सागर महाराज

धर्म

अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज के दर्शन हेतु सुप्रसिद्ध रामकथा वाचक मुरारी बापू पहुंचे इंडिया नहीं भारत बोलो प्रसन्न सागर महाराज
चमोली
अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज उत्तराखंड में बद्रीनाथ से हरिद्वार के लिए विहार कर रहे हैं उनकी अष्टापद की यात्रा हुई पूर्ण

शुक्रवार को सुप्रसिद्ध राम कथा वाचक मुरारी_बापू पहुचे अंतर्मना गुरुदेव के दर्शनाथ हेतु पहुंचे और हुई धर्म चर्चा अलकनंदा नदी के किनारे संपन्न संध्या गुरुभाक्ति प्रवचन मंगल आरती सुप्रसिद्ध राम कथा वाचक मुरारी_बापू दर्शनार्थ पहुचे।

गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि मुझको मेरा प्यारा भारत देश चाहिए..धोती कुर्ता साड़ी लहंगा वेश चाहिए..!भारत और इण्डिया में है भारी अन्तर। कथनी का साधु, करनी का व्यन्तर,, इसलिए इंडिया नहीं भारत बोलो।

उन्होंने इंडिया और भारत के विषय में व्याख्या करते हुए बताया किभारत में गाँव, गली और चौबारा है।
इण्डिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है। भारत में घर, चबूतरा और दालान है।इण्डिया में फ्लैट, क्वार्टर और मकान है। भारत में काका है, बाबा है, दादा-दादी है। इण्डिया में अंकल, आण्टी की आबादी है। भारत में खजूर, जामुन और आम है।

 

और बताया की इण्डिया
मेंमैगी, पिज्जा, माजा (नकली आम) है।भारत में मटके, दोने और पत्तल है। इण्डिया में पॉलिथिन, वाटर, वाईन बोटलें है। भारत में गाय, गोबर और कण्डे है।

 

 

इण्डिया में मौमोज, चिकन, बिरयानी अण्डे है। भारत में दूध, दही और लस्सी है।इण्डिया में प्राण घातक वियर, ह्विस्की, कोक, पेप्सी है।भारत में रसोई है, आँगन है, तुलसी है। इण्डिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है।

 

भारत में कथरी है, खटिया है, खर्राटे हैं। इण्डिया में बेड है, डनलप है और करवटो के साथ खुजलाहट है।
भारत में मन्दिर, तिथि, वार है और हर दिन त्यौहार है। इण्डिया में
पब है, डिस्को है और हॉटल है। भारत में गीत, संगीत और कीर्तन है।
इण्डिया में डान्स है, पॉप है, आईटम है। भारत में बुआ है, मौसी है, बहन है इण्डिया में सब के सब कज़न है।

भारत में पीपल है, बरगद है, नीम है।
इण्डिया में वॉल पर पूरे सीन है।
भारत में आदर, प्रेम और अतिथि का इन्तजार है। इण्डिया में
स्वार्थ हैं, नफरत है, दुत्कार है। भारत में वाणी, व्यवहार और अतिथि सत्कार है। इण्डिया में एक अँग्रेजी, एक बड़बोली और भाषा की चाटुकारता है।

 

भारत में सहज, शुद्ध और सात्विक है। इण्डिया में धूर्त, कपट और चालाकी से वास्तविक है।भारत में सुख,शान्ति, सन्तोष है। इण्डिया में बदहवास,
दु:खी, परेशान है। क्योंकि भारत देव भूमि है। भारत ने सभी तीर्थंकर महापुरूषों को जन्म दिया।इण्डिया ने लालची, लोभी अँग्रेजों को बसाया है।

उन्होंने निर्देश दिया की इसलिये इंडिया कहना त्याग करो, भारत बोलना स्वीकार करो…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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