आत्मधर्म और राष्ट्र धर्म दोनों अलग अलग है, जैन धर्म में राष्ट्र धर्म को ऊपर रखा गया है”-मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज
भोपाल (अवधपुरी)
शंकासमाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने शंकासमाधान कार्यक्रम के अन्तर्गत लाईव प्रसारण में कहा कि आत्मधर्म और राष्ट्रधर्म दो अलग-अलग संकल्पनाएँ हैं, जैन धर्म में राष्ट्रधर्म को आत्मधर्म से ऊपर स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि”अपने राष्ट्र और राष्ट्रीयता को सुरक्षित तथा संरक्षित रखना प्रत्येक राष्ट्रभक्त का परम कर्तव्य है” उन्होंने हाल ही में राष्ट्र पर आए संकट, जैसे कि पहलगाम में घटी अमानवीय घटना, को देश की एकता,अखंडता और सं प्रभुता पर एक चुनौती बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई उनका देश के प्रति कर्तव्य था।
मुनि श्री ने भारत के इतिहास का संदर्भ देते हुए कहा, “हमारी संस्कृति आक्रमण की नहीं, बल्कि आत्मरक्षा (डिफेंस) की है,भारत के मूल शासकों ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया, बल्कि आक्रांताओं को समय पर सबक सिखाया है।”मुनि श्री ने वसुदैव कुटुंबकम् और सर्वात्मभाव की भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा, “जिस धरती पर हम जन्मे और पले-बढ़े हैं, उसके प्रति प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है,देश के सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सभी को मिलजुलकर तथा एक स्वर में सामना करना चाहिए।


उन्होंने कहा कि “मैं अपनी साधु धर्म की मर्यादा में रहते हुए इस विषय में अपनी ओर से तो कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन मैं आप लोगों से कहूंगा कि देश की एकता और संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए आपको सरकार का हर संभव साथ देना चाहिये,”उन्होंने विश्व शांति की कामना करते हुए कहा कि हालांकि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है और अंततः समझौते का मार्ग ही अपनाना पड़ता है। उन्होंने प्रार्थना की कि दो देशों के बीच मंडरा रहे युद्ध के बादल छंट जाएं और शांति स्थापित हो।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि “सब लोग केवल शांति की ही प्रार्थना करेंगे और सामने वाला अशांति करता रहेगा, तो आप कायरों में गिने जाओगे शांति की भावना भाने वाली भावना भाएं और सीमा पर अपनी वीरता को प्रदर्शित करने वाले अपने शौर्य और पराक्रम की गाथा लिखें। उनका काम वो करें, आपका काम आप करें।



मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान भारत सरकार और प्रधानमंत्रीश्री मोदी जी के नेतृत्व में देश ने सही दिशा में आगे बढ़ने पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “सरकार अपने कूटनीतिक प्रयासों से देश की सुरक्षा को संरक्षित करे या जो भी कदम उठाए, पूरे देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए।” उन्होंने जैन समाज के युवक-युवतियों की सक्रिय भागीदारी के संदर्भ में कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और एकता से जुड़े किसी भी सकारात्मक अभियान में उन्हें अपनी भूमिका निभानी चाहिए, जो राष्ट्रभक्ति का ही एक अंग है।
अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

