विराग सागर जी ने जीने की कला सिखाई आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज
इंदौर
रविवार की बेला में सुमति धाम में हो रहे भव्य आयोजन में आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज जी ने आचार्य श्री 108 विराग सागर महाराज को स्मृति में लाते हुए कहा कि जो अपने निकट पहुंचते हैं तो इनडोर (इंदौर) हो जाते है जो पदार्थ के नजदीक आते हैं वह आउटडोर हो जाते हैं।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि आचार्य विराग सागर हमसे दूर नहीं है उन्होंने सभी को व्यवहार सिखाया जीने की कला सिखाई आचार्य विराग सागर महाराज नहीं होते तो इतने संत हमारे पास नहीं होते। उन्होंने अपने शिष्यों को प्रेम सिखाया व्यवहार सिखाया चलना सिखाया।

उन्होंने कहा कि जब उनका अंतिम समय था मैने उनसे सिर्फ 2 मिनिट बात की जिस व्यक्ति ने हमें जीने बैठने की कला सिखाई आज हमारा हीरा हमारे बीच से निकल गया चला गया हम मिल नहीं पाए उनके जाने के बाद आज हम यहां आए वह आत्मा हमारे पास एक एक रत्न दे रही थी

हमें आज उनका एक एक शिष्य हमें जगाने की कोशिश कर रहा है। आज उनके संस्कार हमारे पास है संस्कार हमारे पास है तो हम जिंदा रहे यदि संस्कार से दूर हो जाते हैं तो हम भूल जाते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
