कोटा के एक डाक्टर दंपति परिवार ने विवाह समारोह के आमंत्रण पत्र के द्वारा पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक भावना का दिया अनुपम उदाहरण 

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कोटा के एक डाक्टर दंपति परिवार ने विवाह समारोह के आमंत्रण पत्र के द्वारा पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक भावना का दिया अनुपम उदाहरण 
कोटा
आमतौर पर शादी की पत्रिका कागज पर छपती है। मुझको उपरांत कुछ समय बाद वह पत्रिका कचरे में चली जाती हैं।लेकिन इसके विपरीत कोटा के एक डॉक्टर दंपति ने एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है जी हां कोटा के एक डॉक्टर दंपति ने पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए अनोखा कदम उठाया है। उन्होंने अपने बेटे की शादी के लिए ऐसा आमंत्रण पत्र छपवाया है, जो दो बार धोने के बाद एक खूबसूरत रुमाल में परिवर्तित हो जाएगा।

 

 

उन्हें कैसे आया यह विचार
आमतौर पर लोग जैसा सब करते हैं वैसे ही शादी के आमंत्रण पत्र आदि छपवाते हैं लेकिन इसके विपरीत डॉक्टर दंपति के दिमाग में यह विचार कैसे आया कि इस तरह का आमंत्रण पत्र छपवाना चाहिए जी हां हम आपको बताते हैं। कोटा के रंगबाड़ी योजना में रहने वाले डॉ. गिरीश चंद्र शर्मा और डॉ. रश्मि तिवारी ने अपने बेटे गौरीज गौतम के विवाह के लिए पारंपरिक कागज आमंत्रण के बजाय इको.फ्रेंडली आमंत्रण पत्र तैयार करवाने का निर्णय किया

 

इंटरनेट पर सर्च के दौरान उन्हें महाराष्ट्र के पुणे में ऐसी तकनीक के बारे में पता चला, जिसके बाद उन्होंने फर्म से संपर्क किया और अनोखे रुमाल.पर आमंत्रण पत्र तैयार करवाए।

क्या विशेष एवं खास है इस अनोखे आमंत्रण पत्र में
जी हा इस अनोखे विवाह आमंत्रण पत्र में बहुत कुछ खास है
यह आमंत्रण पत्र डेढ़ फीट लंबा और डेढ़ फीट चौड़ा है, जो खूबसूरत कपड़े पर छपा है। इसमें हमेशा काम आने इंक नहीं, बल्कि टेंपरेरी इंक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे आमंत्रण पत्र दो बार धोने पर पूरी तरह साफ हो जाएगा। कार्ड का कपड़ा इतना बेहतरीन है कि इसे शादी के बाद मेहमान रुमाल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस कार्ड की लागत 37 रुपये प्रति कार्ड है, जो पारंपरिक कागज आमंत्रण पत्र के लगभग बराबर है।

इसके पीछे डॉक्टर दंपति की मंशा

 
इस आमंत्रण पत्र के विषय में
दम्पत्ति का कहना है कि आमतौर पर शादी के आमंत्रण पत्र में मे देवी.देवताओं के चित्र या शुभ प्रतीक होते हैं, लेकिन शादी के बाद कई लोग इन्हें कचरे में फेंक देते हैं। इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। इसी वजह से उन्होंने ऐसा आमंत्रण पत्र बनवाया, जो फेंका न जाए और उपयोग में भी आ सके। पर्यावरण और धार्मिक आस्था का ध्यान रखते हुए इस अनोखे आमंत्रण पत्र को पूरे राजस्थान में खूब सराहा जा रहा है।

 

लोग इसे शादी निमंत्रण का भविष्य का ट्रेंड बता रहे हैं।

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