आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज का सिद्धवरकूट पंचकल्याणक उपरांत सुमति धाम इंदौर के लिए हुआ बिहार पैरों की गर्मी से भावों की परिणति पता चल जाती है आचार्य श्री
सिद्धवरकूट
आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज सानिध्य में 70 साधु संतों की उपस्थिति में पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न हो गया। इतनी बड़ी संख्या में साधु संत लगभग 12 वर्ष बाद क्षेत्र पर उपस्थित हुए।
इस अवसर पर आचार्य गुरुदेव ने कहा कि पैरों की गर्मी से भावों की परिणति पता चल जाती है। अरिहंत भगवान के दर्शन से पाप रूपी हाथी के भी टुकड़े हो जाते हैं। जिनवाणी के विषय में कहा कि जिनवाणी का एक भी शब्द व्यर्थ नहीं जाता है। हर जीव में भगवान की आत्मा को देखना चाहिए। सबके दिन एक से नहीं होते।

उन्होंने कहा कि जैनत्व को समझने के लिए हमारे अंदर समता भाव होना चाहिए। उदाहरण के माध्यम से कहा कि गाय को खुश रखेगे तो वह दूध देती है। निज आत्मा की विशुद्धि रखोगे तो भगवान आत्मा बन जाओगे। जीवन में सबके सुख-दुख की खबर रखना चाहिए। रुपए देने वाले बहुत मिल जाएंगे लेकिन समय देने वाले नहीं मिलते।

उन्होंने का जीवन में प्यार नहीं वात्सल्य भाव होना चाहिए। प्यार अंधा होता है। वात्सल्य भाव सम्यक दृष्टि का होता है। श्रुत श्रमण हम सबके लिए आवश्यक है। श्रुत को जो श्रद्धा से सुनते हैं वह भविष्य के भगवान है।

आचार्य श्री संघ ने संध्या की बेला में क्षेत्र से होने जा रहे पट्टाचार्य महोत्सव हेतु सुमतिधाम इंदौर हेतु मंगल विहार किया। लगभग 400 साधु संतों की उपस्थिति में आचार्य श्री को पट्टाचार्य पद पर सुशोभित किया जाएगा। यह आयोजन 27 अप्रैल से 2 में तक आयोजित होगा।

30 अप्रैल को आचार्य श्री को आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज की घोषणा अनुरूप पट्टाचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
