“गुरु कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सरल से सरल मार्ग बताते हें”प्रिय वचन ही उत्कृष्ट वचन बनते है”मुनि श्री समतासागर महाराज
(रायपुर)
मां कभी बच्चे के साथ भेदभाव नहीं करती, दूध में पानी वह स्नेह भाव से मिलाती है जिससे बच्चे को दूध पच सके उसी प्रकार जीवन में किस व्यक्ति से क्या कार्य लिया जाए यह गुरु ही समझ सकता है,वह किसी की उपेक्षा नहीं करता, बल्कि किस व्यक्ति से कौनसा कार्य कराना है इस बात को वह अच्छी तरह समझते है,यथायोग्य कार्य देकर समाज को जोड़ने का कार्य करते है, “आत्म बने परमात्मा,हो शांती सारे देश में, है देशना,सर्वोदयी महावीर के संदेश में”
मुनि श्री ने कहा कि भगवान के शासन को “सर्वोदय शासन” और जिन शासन क्यों कहा? भगवान महावीर ने अपने को जीता है इसलिये उनको जितेन्द्रिय कहा जाता है, सर्वोदय शासन का मतलब है जिसमें सबके कल्याण की बात आई हो ऐसा शासन सर्वोदय शासन माना गया है,आचार्य समन्तभद्र स्वामी ने “सर्वोदय” शब्द की व्याख्या दो हजार वर्ष पहले कर दी थी, महात्मागांधी ने “सर्वोदय” का नारा दिया तथा आगे बढ़ाते हुये सत्य “अहिंसा” के इस प्रयोग को अपनाते हुये अपने देश को तो आजाद कराया ही कराया बल्कि सारी दुनिया के सामने चमत्कृरित कर दिया ऐसा “सर्वोदय” का सिद्धांत तीर्थंकर भगवन्तों का सिद्धांत है जिसमें सभी जीवों के कल्याण की बात कही गई है,समवसरण में तीर्थंकरों की जब देशना होती है तो यहा पर भले ही हम चतुर्मुखी भगवान को विराजमान किये है,लेकिन साक्षात समवसरण में तो भगवान का मुख तो एक ही रहता है लेकिन आप जिस दिशा से देखना चाहते हो उस दिशा से भगवान और उनकी देशना खिरती है।

मुनि श्री ने कहा गुरु के वचन को उपकरण कहा गया है जो मानवीय उत्थान के साथ कार्य करती है।पिच्छिका जीवदया के क्षेत्र में संयम का उपकरण है कमंडल शुद्धि का उपकरण है उसी प्रकार नयन का उपनयन अर्थात चश्मा भी उपकरण है।आचार्यों ने तो इस शरीर को भी उपकरण ही माना है क्योंकि मनुष्य पर्याय से ही मुनि बनकर मोक्ष पद को पाया जा सकता है,इसलिये इस शरीर का उपभोग नहीं करना है उपयोग करना है, मुनि श्री ने कहा कि जो पुण्यशाली जीव होते है वह समवसरण के बाहरी रागरंग से प्रभावित नहीं होते यदि आपका मन उस रागरंग में चला गया तो आत्मतत्व से वंचित हो जाओगे और यदि इस शरीर का उपयोग किया तो यही शरीर आपको मुक्ती का मार्ग प्रशस्त करेगा

मुनि श्री ने कहा कि कड़वी तुम्वी का उपयोग भी है और उपभोग भी है यदि उसे सुखा दिया तो वह तुम्हारे काम आएगी और यदि उपभोग कर लिया तो वह जहर का काम भी करती है। मुनि श्री ने कहा कि यह सारी चर्चा आपके ज्ञानवर्धन के लिये यहा पर की जा रही है जिससे समाज और परिवार में समरसता का वातावरण बना रहे,

मुनि श्री ने कहा कि परिवार को बनाना और परिवार से निभाना बहुत कठिन कार्य होता है हम अपने परिवार को तो समृद्ध बना सकते है,लेकिन सारी समाज को समृद्ध बनाने के लिये बड़ी उदारता का परिचय देना पड़ता है, अपना पराया छोड़कर व्यवहार को निभाना पड़ता है। मुनि श्री ने कहा कि जैसे शरीर के किसी अंग में तकलीफ होती है तो वह शरीर की ही तकलीफ़ मानी जाती है, उसी प्रकार समाज में कोई छोटा बड़ा नहीं होंना चाहिये, यदि किसी को कोई दुःख दर्द है तो उसका सहारा बनकर आगे आना चाहिये।

मुनि श्री ने कहा किसी भी संरचना में बहुत परिश्रम तथा समय लगता है बनाने में बहुत समय लगता है,बनी बनाई विल्डिंग को गिराने में विचार नहीं करना पड़ता मुनि श्री ने कहा कि जन्म कुंडली सब बनवाते है मरण कुंडली कोई नहीं बनवाता इसलिये जिस कार्य के लिये आप सभी रायपुर वासियों ने आचार्य गुरुदेव से आशीर्वाद लिया है उस और खूब सलाह के साथ कार्य को आगे बढ़ाए कार्यकर्ताओं को ताश के पत्तों का महल नहीं बनाना है गगनचुबी मंदिर बनाना है सभी बातें सभी को नहीं बताई नहीं जाती योजना को अमल करने में थोड़ा बिलंब हो सकता है हम सभी ने नई तथा पुरानी कमेटी के सभी पदाधिकारियों से चर्चा की सभी को मिल जुल कर कार्य को आगे बढ़ाना है आप लोगों ने हमें जो योजना बताई है मुनिसंघ का आपको बहुत बहुत आशीर्वाद है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
