पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर महाराज के समाधी दिवस भाव भीना नमन

धर्म

पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर महाराज के समाधी दिवस भाव भीना नमन

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री 108  शांतिसागर गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108  अजितसागर महाराज का जीवन परिचय

मध्यप्रदेश आष्टा नगर के समीप भौरा ग्राम में श्रीमती रूपा देवी श्री जवर चंद जी के चतुर्थ पुत्र का जन्म 1008 श्री चंद्र प्रभ भगवान के मोक्ष कल्याणक के पावन दिन अवतरण हुआ पुत्र का नाम श्री राजमल जी रखा गयाशुभ दिन था फागुन शुक्ला 7 सप्तमी विक्रम संवत 1982 सन 1925 मे हुआ

         प्रथम गुरु दर्शन

इन्हे अपने जीवन मे प्रथम गुरु दर्शन 18 वर्ष की अल्प उम्र सन 1943 में गुरुदेव श्री वीरसागर महाराज के हुए और संघ में प्रवेश की अनुमति लेकर संघ में प्रवेश किया इन्होने 2 वर्षो तक  शास्त्रों का स्वाध्याय निरंतर किया

  व्रत प्रतिमा

आगे चलकर 2 वर्ष उपरांत झालरापाटन राजस्थान में 20 वर्ष की उम्र में 7 प्रतिमा तथा ब्रह्मचर्य व्रत के नियम आचार्य कल्प श्री वीरसागर महाराज  से ग्रहण किये इसके उपरान्त आचार्य श्री वीर सागर महाराज की समाधि कारण दिव्तीय पट्टाधीश आचार्य श्री108  शिवसागर महाराज से मुनि दीक्षा हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया विक्रम संवत 2018 कार्तिक सुदी 4 रविवार सन 1961 को सीकर राजस्थान में मुनि दीक्षा ग्रहण कर श्री राजमल मुनि श्री 108 अजित सागर  बन गए मुनि श्री अजित सागर महाराज आचार्य श्री शिव सागर  के साथ ही रहे

  आचार्य पद

तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी की समाधि के पश्चात इनको चतुर्थ पट्टाधिश ज्येष्ठ शुक्ला 10 संवत 2044 7 जून 1987 उदयपुर में आचार्य पद दिया गया

                  आचार्य पद का आज्ञा पत्र

आचार्य श्री अजित सागर महाराज  ने स्वास्थ्य प्रतिकूल होने के कारण 31 जनवरी 1990 को संघस्थ मुनि श्री 108 वर्द्धमान सागर ज को अपने बाद परम्परा के आचार्य पद का संस्कृत में आज्ञा पत्र लिखा

 

 

 

 

सल्लेखना

वैशाख शुक्ला पूर्णिमा संवत 2047 सन 1990 को आपकी समाधि हो गई आपके द्वारा
मुनि श्री108  हित सागर जी मुनि श्री 108  पुण्य सागर जी  मुनि श्री 108 सौम्य सागर जी मुनि श्री108 हेमंत सागर जी मुनि श्री108 विराग सागर जीमुनि श्री 108 चिन्मय सागर जी मुनि श्री 108 कीर्ति सागर जी महाराज के रूप मे मुनि दीक्षा प्रदान की

इसी के साथ आर्यिका 105 श्री अनंतमति माताजी आर्यिका 105 श्री सौम्यमति माताजी आर्यिका श्री 105 दक्षमति माताजी आर्यिका 105 श्री सौरभमति माताजी आर्यिका 105 श्री चैत्यमति माताजी आर्यिका दीक्षा प्रदान की व 2 क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की

 

अपने जीवन कल मे 29 वर्षायोग किए

राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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