मुनि पुंगव सुधासागर महाराज को अशोक नगर दिगंबर जैन समाज ने पंचकल्याणक महोत्सव हेतु निवेदन करते हुए किया श्रीफल भेंट गोलाकोट पंच कल्याणक महोत्सव के बाद समय मिलेगा –मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज

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मुनि पुंगव सुधासागर महाराज को अशोक नगर दिगंबर जैन समाज ने पंचकल्याणक महोत्सव हेतु निवेदन करते हुए किया श्रीफल भेंट गोलाकोट पंच कल्याणक महोत्सव के बाद समय मिलेगा –मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज
अशोकनगर–
अशोक नगर के सबसे प्राचीन जिनालय श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन गांव मन्दिर की प्रतिष्ठा को लेकर श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ का निवेदन लेकर श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के अध्यक्ष राकेश कासंल अन्य प्रमुख जन अतिशय क्षेत्र बहोंरीबंद में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ क्षुल्लक श्री गंभीर सागर जी महाराज क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज ससंघ को श्री फल भेंट कर अशोकनगर पंच कल्याणक महोत्सव का निवेदन किया

अशोक नगर जैन समाज एक झंडे के नीचे रहने वाली भक्त समाजो में गिनी जाती है


इस अवसर पर मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि अशोक नगर जैन समाज एक झंडे के नीचे रह कर काम करने वाली बड़ी भक्त समाज में गिनी जाती है अशोक नगर वालों ने अपने लिए थूबोनजी के लिए कितने श्री फल चढ़ाएं है कहना मुश्किल है अभी दिशा आप की ओर ही है गोलाकोट पंच कल्याणक के बाद चिंता मत करो तुम्हारा ही नम्बर आने वाला है तारीख भी मिल जाएगी।देखते हैं अच्छे मुहूर्त में शुभ कार्य को प्रारंभ करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मन्दिर के निर्माण के सम्बन्ध में मन्दिर का क्षेत्र कैसा है, वास्तु कैसा है, मूर्ति कैसी है और सबसे बड़ी है समाज की विशुद्धि होना चाहिए, समाज की सहमति हर्ष-उल्लास होना चाहिए, विसंवाद नहीं। अन्यथा मंदिर बनाने से कोई फायदा नहीं, उन मंदिरों में कोई अतिशय नहीं आएगा। साथ ही उपधान- कोई न कोई संकल्प, त्याग रखना चाहिए आपके त्याग संकल्प से प्रतिष्ठा के पहले ही मन्दिर में अतिशय देखने को मिलाने लगेंगे ।

आज पंच कल्याणक महा महोत्सव की अधिकता हो गई है
इस दौरान मुनिश्री ने कहा कि पहले इतने पंचकल्याणक नहीं होते थे और न ही इतनी व्यवस्थाएं थी, राजाओं के राज्य थे और अंग्रेजों का प्रवेश भारत में हो चुका था, मंदिर बनाना सहज नहीं था, ऐसा बताते हैं कि जीवराज पापड़ीवाल ने एक लाख प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा कराई थी और सारे भारत में घोषणा कराई थी कि जहां के लिए भी प्रतिमा चाहिए उन्होंने स-सम्मान भेजा। साथ ही यथा शक्ति सहयोग दिया, मंदिर या वेदी नहीं थे तो मंदिर, वेदी भी बनवायें। लगभग 15 वी शताब्दी की प्रतिमाओं में उनका नाम मिलता है तंत्र यानी विधान, आकार, स्रोत तो इस प्रकार ये भावनाएं, सब प्रभावकारी होते है। कोई आपके दुख से दुखी हो रहा है तो बराबर उसका प्रभाव पड़ता है, इसी कारण से कहते हैं कि किसी को दुख मत दो। तंत्र विद्या को जब सम्मोहन में बदल देते हैं तो वह विकृत हो जाती है और जब श्रद्धा का रूप लेती है तो वरदान सिद्ध होती है।

 

जो साध्य को सिद्ध कर दे वही तीर्थ कहलाता है

उन्होंने कहा कि तीर्थ का अर्थ होता है- घाट, तंत्र, साधन। जो साध्य को सिद्ध कर देता है वो तीर्थ कहलाता है। रत्नत्रय को भी तीर्थ कहा। जिन-जिन कार्यों से हमारे परिणाम पवित्र होते हैं, हम सम्यक्त्व की ओर जाते है, वे तीर्थ संज्ञा को प्राप्त होते है द्रव्य तीर्थ कहलाता है भगवान की मुद्रा, दिगंबर मुनि का वेष- जिनकी बाह्य मुद्रा को देखकर भी संसार से विरक्ति होती है क्षेत्र तीर्थ- जहाँ से महान आत्माएं अपना उद्धार करती हो। उस तीर्थ पर जाकर बैठना- सम्मेदशिखर। जिस स्थान पर जाने पर पवित्रता की अनुभूति होती हो भाव तीर्थ- संकल्प, लक्ष्य। हम कोई भी क्रिया करेंगे तो कर्मों के क्षय करने के लिए करेंगे। जिस समय व्यक्तिगत रत्नत्रय में स्थित होता है, उस समय वह भाव तीर्थ रूप बनता है।

कोई भी पवित्र रज को पवित्रा के रूप में घर में रख सकते हैं
उन्होंने कहा कि कोई भी पवित्र रज होती है, उसको पवित्रता के रूप में ले जाना ठीक है, उसकी पूजा कर सकते हैं, माथे पर लगा सकते है लेकिन मकान में लगाना या नींव में डालना
मंगल कलश ले जाते हैं, उन्हें मांगलिक रूप में रखिए। उन्हें अपने भोजन, पानी पीने आदि उपयोग में नहीं ले सकते। धार्मिक वस्तु पूजा के योग्य है, उपयोग के नहीं यदि तुम भगवान को अपना मानते हो तो यह बताओ तुमने अपनी जिंदगी में इनके लिए क्या किया है। बेटे के समान की भगवान 2 घंटे में तेरे लिए कमाऊँगा ये अनुभव में आना कि मैंने कितना परिश्रम, कितने परिणाम किये होंगे, आज निगोद से यात्रा करके हम यहाँ तक आ गए कि जहाँ भगवान तो नहीं बन पाए लेकिन कम से कम भगवान को पहचान तो लिया, इससे पक्का है एक दिन भगवान भी बनेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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