संत समागम में धर्म उपदेश सुन ,समझ मनन चिंतन कर जीवन में धार्मिक परिवर्तन करने का पुरुषार्थ करेआर्यिका श्री महायशमति माताजी

धर्म

संत समागम में धर्म उपदेश सुन ,समझ मनन चिंतन कर जीवन में धार्मिक परिवर्तन करने का पुरुषार्थ करेआर्यिका श्री महायशमति माताजी

धारियावद

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी धरियावद विशाल संघ सहित विराजित हैं प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ समाज को मिल रहा हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी परंपरा के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी का 57 वा अंतर विलय समाधि वर्ष आचार्य संघ सानिध्य में विशेष पूजन विनयांजलि सहित मनाया जावेंगा। प्रातः आयोजित धर्म सभा में आर्यिका 105 महायशमति माताजी ने उपदेश में बताया कि धरियावद समाज में बहुत पुण्य अवसर आया है जो विगत चातुर्मास सहित 11 माह से आपको मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज संघ का समागम और धर्म का लाभ मिल रहा है। संत सानिध्य से जीवन अच्छा मनाया जाता है इससे जीवन में आप परिवर्तन ला सकते हैं भौतिक युग में आपको पाप की क्रियायो से बचना चाहिए और पुण्य में वृद्धि करना चाहिए, इसके लिए पुरुषार्थ और प्रयास से जीवन को धर्म में लगाकर कार्य करना चाहिए ।देव गुरु दर्शन, अभिषेक पूजन का कार्य संत सानिध्य में करना चाहिए ।जीवन को सही दिशा में ले जाना चाहिए। माताजी ने सीखना और समझने में विवेचना करते हुए बताया कि समझने से ज्यादा सीखना महत्वपूर्ण है संत अनेक कल्याणकारी उपदेश से बताते हैं कि श्रावको को प्रतिदिन देवदर्शन करना ,पानी छानकर पीना और रात्रि भोजन नहीं करना मुख्य कर्तव्य है यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की शिष्या आर्यिका  महायशमति माताजी ने धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर कही। गज्जूभैया, वीणा दीदी ,राजेश पंचोलिया अनुसार पूज्य माताजी ने तीन मूर्ति की कहानी के माध्यम से बताया कि एक मूर्ति में एक कान से दूसरे कान तक तार निकल जाता है दूसरी मूर्ति में कान से डाला गया तार मुंह से निकल जाता है किंतु तीसरी मूर्ति में कान से डाला गया तार पेट में ही रह जाता है अर्थात कुछ श्रावक प्रवचन सुनकर एक कान से दूसरे कान निकाल देते हैं कुछ श्रावक एक कान से प्रवचन सुनकर मुंह से निकाल देते हैं किंतु तीसरे प्रकार के श्रेष्ठ श्रावक कान से प्रवचन सुनकर उसे पेट में रखते हैं उस पर मनन चिंतन करते हैं। इसलिए गुरु उपदेश सुनकर,जिनवाणी को पढ़कर जीवन में उतार कर जीवन को सार्थक करने का प्रयास करना चाहिए। आज जो भी साधु दिख रहे है वह आचार्य श्री शांति सागर जी की देन हैं आपने दीक्षा गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद कर बताया कि आपने मात्र 19 वर्ष की युवाउम्र में सीधे मुनि दीक्षा ली। आज मुनि श्री महोत्सव सागर ,श्री मुदित सागर ,श्री उत्सव सागर जी एवं आर्यिका105 श्री समर्पित मति माताजी ने केशलोचन किए। राजेश पंचोलिया से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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