महान व्यक्तित्व थे सेठ हुकुमचंद जैन पुण्यतिथि पर विशेष

धर्म

महान व्यक्तित्व थे सेठ हुकुमचंद जैन पुण्यतिथि पर विशेष
इंदौर
एक ऐसे व्यक्तित्व जिन्होंने इंदौर का नाम रोशन किया, जिन्हें हाबल्या कबिल्या के नाम से जाना जाता था ऐसे बिरले व्यक्तित्व के धनी और कोई नही थे वे थे दानवीर सर सेठ हुकुमचंद जैन जिनकी 26 फरवरी को पुण्यतिथि है।

 

राजस्थान के लाडनूं गांव से माता जबरीबाई और पिता स्वरूपचंद की संतान हुकुमचंद इस आधुनिक युग में उतनी ही श्रद्धा से याद किए जाते हैं। जितने तब सम्मानित थे। उनके प्रसंगों में उभरते राष्ट्र की परिकल्पना और विकसित भारत का वह आत्म-निर्भर स्वरूप था। उनके कार्यों से आज भी प्रेरणा हमें मिलती है। तभी तो इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद का नाम अमेरिका के शेयर बाजार के ऑफिस यानी स्टाक एक्सचेंज में आज भी स्वर्ण अक्षरों मे अंकित है।

सेठ हुकुमचंद ने लोगों को रोजगार दिया
हुकुमचंद सेठ जी के बारे में यहां कहा जाता था कि आज का भाव यह, लेकिन कल का सेठ हुकुमचंद जाने। वहीं बहुत थोड़े समय में ही हमारे शहर में उद्योग धंधों की बहार लाने वाले कपडा मिलों के जनक सेठ हुकुमचंद ने लोगों को रोजगार दिया। तभी इस छोटे से शहर को भव्यता दिलाने के लिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और इंदौर के इतवरिया बाजार ने व्यापार शैली के अनमोल रत्न हुकुमचंद को सेठ बनाया। वहीं सेठ की कर्मभूमि थी। सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में उन्हें जैन सम्राट, तीर्थ भक्त शिरोमणि, रायबहादुर, राज्य भूषण, राव राजा जैसी उपाधि से विभूषित किया गया था। सर सेठ हुकुमचंद जैसा दानवीर सेठ उस जमाने में दूसरा कोई नहीं रहा।

 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अगवानी की
हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दो बार इंदौर आए और दोनों बार उनके स्वागत की जिम्मेदारी सेठ हुकुमचंद की ही थी। जब उनके निवास स्थल इंदभवन में गांधीजी ने भोजन किया तो वह भोजन उस जमाने मे चांदी के बर्तनों में कराया गया था। गांधी जी ने चुटकी लेते हुए बोले में तो जिस बर्तन में भोजन करता हूं। वह अपने पास ही रख लेता हूं। इस पर बड़ी ही विनम्रता से सेठ ने कहा- यह तो आप के लिए ही है । फिर सेठ ने महात्मा गांधी को उनके भलाई के कार्यों के लिए राष्ट्र सेवा के लिए दान दिया।

 

उन्हें काॅटन ऑफ किंग भी कहा जाता था
इंदौर के हिन्दी साहित्य समिति के भवन निर्माण में भी सेठ हुकुमचंद जी का बहुत बड़ा योगदान रहा। इस महानगर इंदौर में सेठ का सहयोग कभी भी शहर नहीं भूल सकता। उन्होंने तो पीढ़ियों को सुधार दिया। पुराने जमाने के भारत के जैन समाज के सबसे ताकतवर और समाजसेवी के रूप में वह मार्गदर्शक रहे। विश्व बाजार में आप के नाम की धूम थी। तभी तो उन्हें काॅटन आफ किंग भी कहते थे।

 

परोपकार के प्रतिरूप थे सर हुकुमचंद
सर सेठ हुकुमचंद ने संत, महात्मा, मुनियों तथा त्यागियों के लिए संत निवास और भवन निर्माण करवाए । पूरे भारत के जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार किए। परेशान यात्रियों के लिए धर्मशाला, बीमार दु:खियों के लिये दवाखाना, अस्पतालों का निर्माण करवाया था। वह सही में पुण्यात्मा,परोपकार और परमार्थ के प्रतिरूप थे।
श्रीफल जैन न्यूज से प्राप्त संकलन के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *