जो पिता की चरण वंदन करते हैं वह संपत्ति हीन नहीं होते हैं और जो माँ के चरण स्पर्श करते हैं वो ममता हीन नहीं होते।अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज
कानपुर
कानपुर में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि पिता की उपलब्धियों से लेकर आपकी पहचान तक का सफ़र..और आपकी उपलब्धियों से पिता की पहचान तक का सफर ही जीवन की असली कमाई का सफर है..!
उन्होंने कहा यदि पिता के नाम से बेटे की पहचान है तो कोई बड़ी बात नहीं है। यदि बेटे के नाम, गुण और उपलब्धियों से पिता की पहचान है तो मानना हमने कुछ कमाया है। इसलिए रामायण में लिखा है–?

प्रातः काल ऊठई रघुनाथा, मात पिता गुरू नवावई माथा..जो पिता की चरण वन्दना करते हैं, वो सम्पत्ति हीन नहीं होते। और जो माँ के चरण स्पर्श करते हैं, वो ममता हीन नहीं होते।




जो भाई के चरण स्पर्श करते हैं, वो कभी शक्ति हीन नहीं होते। जो बहिन की चरण वन्दना करते हैं, वो कभी चरित्र हीन नहीं होते। जो गुरू की चरण वन्दना करते हैं, वो बुद्धि हीन नहीं होते।जो भगवान की चरण वन्दना करते हैं, वो कभी भाग्य हीन नहीं होते।


महाराज श्री ने कहा जीवन में – जो झुकने से मिलता, वो अकड़ने से नहीं मिलता। जीवन श्रेष्ठ गुणों, मधुर वाणी और अच्छे व्यवहार से स्मरणीय बनता है।_उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से बताया किआपने देखा होगा – दूध, दही, छाछ, मक्खन, घी, सब एक ही कुल के होते हुये भी अलग अलग मूल्य में बिकते हैं…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
