चांदखेड़ी में मनाया जाएगा आचार्य पदारोहण दिवस

धर्म

चांदखेड़ी में मनाया जाएगा आचार्य पदारोहण दिवस
चांदखेड़ी
चांदखेड़ी में विराजमान आचार्य श्री 108आर्जवसागर जी महाराज का 11 वा आचार्य पदारोहण दिवस दिनांक 3 फरवरी 2025 को दोपहर 2:30 बजे से मनाया जाएगा। जिसमें आचार्य भगवन के देश विदेश के भक्तगण भी सम्मिलित होंगे।

 

आपको विदित करा दें कि चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शान्तिसागरजी की परम्परा के पुराने आचार्य श्री 108 सीमंधरसागरजी ;समाधि सम्राट स्वर्गीय परम पूज्यनीय बाल ब्रह्मचारी श्री 108 सुपार्श्वसागरजी (आचार्यश्री 108 चा.च. शान्तिसागरजी महाराज की परम्परा में) के शिष्य बाल ब्रहाचारी, तपोनिष्ठ चारित्र-चक्रवर्ती का जीवन बहुत ही महान था।
आचार्य श्री सीमन्धर सागर जी को खोज थी कि मेरी 12 वर्ष की सल्लेखना सम्पूर्ण होने वाली है और मुझे अपनी चा.च.आ. शान्तिसागरजी की परम्परा के कोई प्रभावक, चारित्रवान, साधक साधु यहीं पर उपलब्ध होंगे, जिन्हें कि मैं अपनी परम्परा का उत्तरदायित्व सौंप सकूँगा। जिससे कि हमारे उत्तरदायित्त्व को ग्रहण करने वाले चा.च.आ. शान्तिसागरजी की जयकार ध्वनि हमेशा गुंजायमान करते रहें। वैसा ही योग बना कि कुछ वर्षों से इंदौर के लोग गुरुवर आर्जवसागरजी मुनिराज को उनका स्वास्थ आदि शुभ समाचार देते-लेते रहते थे। एक दिन इस भारत में भद्रबाहु जैसा संघ लेकर विचरण करने वाले चतुर्थ कालीन चर्या के साधक सन्त शिरोमणी आ. विद्यासागरजी महाराज के प्रियतम शिष्य 37 वर्षों से दीक्षित, बहु भाषाविद् साहित्य सृजक, धर्मप्रभावक मुनिवर आर्जवसागरजी मुनिराज को आपने अपने उत्तरदायित्त्व के योग्य जानकर स्मरण किया और उन्हें अपने पास बुलाया। तब गुरुवर आर्जवसागरजी महाराज की करुणा देखो कि मात्र करीब 10 दिन में सुबह, शाम विहार करते हुए अपने घुटने का दर्द, और पैरों के छालों को भी न देखते हुए मानो उड़ते पैर ही इतनी सुदूर करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर हरदा से सिद्धवरकूट होते हुए वैव्यावृत्ति और सेवा के निमित्त बड़े वात्सल्य पूर्वक इन्दौर के पास विराजमान आ. सीमंधरसागर जी के पास पहुँचे।

आगम में कहते हैं कि अगर कोई मुनि संघ सम्मेद शिखरजी की यात्रा को भी जा रहे हों तो और उन्हें यह ज्ञात हो जाय कि कहीं पर मुनिराज को सल्लेखना चल रही है तो सम्मेद शिखर जैसी महत्त्वपूर्ण यात्रा को स्थगित कर सर्व प्रथम समाधि को देखें। क्योंकि अपने जीवन में भी इसे अवश्य धारण करना है। इससे महत्त्वपूर्ण और क्या कार्य हो सकता है? ऐसे उत्तम समय में क्षपक मुनिराज का दर्शन करना बहुत महत्त्वपूर्ण और दुर्लभ बात होती है।

 

आ. सीमंधरसागरजी ने अपनी समाधि का अन्तिम काल निकट जानकर माघ शुक्ल षष्ठी वीर.नि. संवत् 2541 ता. 25.1.2015 को देश, कुल, जाति से शुद्ध मुनिवर आर्जवसागरजी को चतुर्विध संघ के बीच अपना आचार्य पद सौंपा था। जिन्होंने सन् 1984 से बुन्देलखण्ड की कुंडलपुर निकटस्थ भूमि से वैराग्य धारणकर आचार्य विद्यासागरजी संघ को स्वीकारा और उन्हीं गुरु के चरणों में ब्रह्मचर्य व्रत लेकर सप्तम प्रतिमा, और क्षुल्लक, ऐलक तथा मुनि पद को धारण कर इस भारत के चौदह प्रदेशों में अपूर्व प्रभावना की। वह इस पद के योग्य बने।

 

 

इस तरह आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज का आचार्य पद इंदौर नगर में हुआ था।

संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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