मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है – बालाचार्य निपूर्ण नन्दी महाराज
भक्तामर महामण्डल अनुष्ठान में 3 काव्यों की हुई महाअर्चना
निवाई – श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर में आयोजित 16 दिवसीय भक्तामर महामण्डल अनुष्ठान के तहत बालाचार्य निपूर्ण नन्दी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गृहस्थ से ही श्रावक बनता है और श्रावक से ही साधू। आठ वर्ष में गृहस्थ श्रावक भी बन सकता है और साधू भी बन सकता है और सम्यग्दर्शन, सम्यगज्ञान, तथा सम्यगचारित्र की पूर्णता करके आत्मा की शक्ति को प्रगट करके परमात्मा भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि उलझनों में उलझा हुआ स्वंय को जानने का जो पुरुषार्थ करता है वह श्रावक है। गृहस्थ संघर्षशील नहीं होता वह परिस्थितियों के साथ समझौता कर लेता है। बालाचार्य श्री निपूर्ण नन्दी महाराज ने अनुष्ठान में श्रद्धालुओं को कहा कि संसार के प्रत्येक आत्मा में भगवान बनने की शक्ति विघमान है किन्तु राग द्वेष मोह कषाय अज्ञान आदि के चक्र में फंसा हुआ यह प्राणी अपनी शक्ति को भूला हुआ है स्व अस्तित्व को नहीं पहचान पा रहा है यदि वह पुरुषार्थ करें तो
परमात्मा पद को पा सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। जैन समाज के मीडिया प्रभारी विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि 16 दिवसीय भक्तामर महामण्डल अनुष्ठान के चलते दूसरे दिन पण्डित सुरेश कुमार शास्त्री के निर्देशन में जैन मुनि बालाचार्य महाराज संध के सानिध्य में भगवान शांतिनाथ जी के अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। भक्तामर महामण्डल
अनुष्ठान में शुक्रवार को सोधर्म इन्द्र अशोक जैन कोटा, कुबेर इन्द्र कुन्दन मल तेजमल कठमाणा एवं नरेन्द्र जैन को इन्द्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंदिर कमेटी मंत्री मुकेश बनेठा एवं विमल जौंला ने बताया कि सभी इन्द्र इन्द्राणियो ने मण्डप पर 240 श्री फल अर्ध्य समर्पित किए एवं 3 काव्यों की संगीतमय पूजा अर्चना करते हुए भक्ति नृत्य किये।
