आचार्य श्री धर्म सागर जी का 56 वा आचार्य पदारोहण एवम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 56 वा दीक्षा दिवस उत्साह एवम श्रद्धा पूर्वक मनाया।आचार्य श्री धर्म सागर विधान की पूजन की गई।
पारसोला
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित पारसोला विराजित हैआचार्य संघ के सानिध्य में धवजारोहण दीप प्रज्वलन अतिथियों द्वारा किया गया। मंगलाचरण से सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का शुभारंभ हुआ आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य रोड़ी देवी धाटलिया परिवार को प्राप्त हुआ ।दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के 56 वे आचार्य पदारोहण के अवसर पर आयोजित आचार्य धर्म सागर विधान की पूजन के बाद धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भावांजली में कहा कि गुरु शिष्यों को धर्म का स्वरूप और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं
आप नाम के अनुरूप धर्म के सागर रहे। आप धर्म के प्राण और आधार थे। गुरु की पूजन धर्म प्राप्त कर कर पुण्य अर्जित कराती हैं। जो शिष्य गुरु के वचनों को प्रीति पूर्वक श्रद्धा से ग्रहण करता है
उसका उत्थान अवश्य होता हैं।आज हम जो कुछ है हमारे पूर्वाचार्यों गुरुओं का आशीर्वाद है कि हम प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा का कमजोर कंधो से संचालन कर रहे हैं गुरु के कृपा से शिष्यों भक्त के सभी कार्य पूर्ण होते हैं। आचार्य श्री धर्म सागर जी बहुत ही पुण्य शाली आत्मा रहे क्योंकि आपका जन्म और समाधि मरण तीर्थंकर भगवान के कल्याणक पर हुआ।


यह भावांजलि दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के 56 वे आचार्य पदारोहण के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की ।ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या,राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज के बारे में विनियांजलि प्रस्तुत करते हुए आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि आपका जन्म गंभीर ग्राम में हुआ बचपन में माता-पिता के स्वर्गवास होने पर आपकी बड़ी बहन ने आपकी परवरिश करी आप ने गंभीरा ग्राम के पास में ही किराना दुकान खोली थी किंतु आपकी धार्मिक गतिविधि ज्यादा होने के कारण व्यापार चला नहीं ।आप इंदौर मध्य प्रदेश में कपड़ा मिल में नौकरी करने आए कपड़ा मिल में जीवों के हिंसा के कारण अपने कपड़ा मिल की नौकरी भी छोड़ दी स्वयं का कपड़े की गठरी का व्यापार प्रारंभ किया आपकी निस्पृहता इतनी थी कि ₹1 का मुनाफा उस समय हो जाने पर आप व्यापार बंद कर अपने घर वापस आ जाते थे जब आचार्य श्री वीर सागर जी महाराज का इंदौर बड़नगर की ओर प्रवेश हुआ तब आपने उनसे व्रत प्रतिमा के नियम अंगीकार किया और संघ के साथ शामिल हो गए आचार्य श्री ने बताया कि आचार्य श्री धर्म सागर जी की क्षुल्लक दीक्षा महाराष्ट्र प्रांत में हुई और एलक और मुनि दीक्षा फुलेरा ग्राम में हुई ।आप साधु जीवन में भी काफी निस्पृहि रहे ।आपको भोले बाबा के नाम से सभी जानते थे। आपने अनेक संस्मरण भाव विभोर होकर सुनाएं। आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश होने के कारण वर्ष 1974 में भगवान श्री महावीर स्वामी का 2500 वा निर्वाण महोत्सव आपके प्रमुख सानिध्य में देहली में मनाया गया। जैन धर्म के चारो समुदाय में कभी भी दिगंबर धर्म के सिद्धांतो की उपेक्षा नही होने दी।

आचार्य श्री ने बताया कि आप इतने निस्पृही थे कि चश्मा तक नहीं रखते थे ,माला फेरने के लिए कंकर पत्थर चांवल से माला फेरते थे उसका भी परिग्रह आपके साथ नहीं रहता था । इस प्रकार आचार्य श्री ने अनेक संस्मरण आपके बारे में बताएं। आचार्य श्री के सानिध्य में आचार्य श्री धर्म सागर जी विधान की पूजन हुई। संयोग था कि
24 फरवरी फागुन शुक्ला 8 को आचार्य श्री धर्म सागर जी ने 11 दीक्षाए दी जिनमे मुनि श्री वर्धमान सागर जी को 19 वर्ष की आयु में दीक्षा दी। वर्तमान में आचार्य श्री धर्म सागर जी के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी,आर्यिका श्री शुभ मति जी सहित 6 शिष्य है।आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का भी पारसोला समाज ने 56 वा दीक्षा दिवस मनाया अनेक श्रद्धालुओं ने चरण प्रक्षालन और विशेष द्रव्यों से पूजन की तथा आचार्य श्री का गुणानुवाद किया।प्रतिदिन अनेक नगरों से निवासी श्रीफल भेंट कर नगर आगमन और उपदेश हेतु निवेदन कर रहे हैं । सिद्ध चक्र महामंडल विधान की पूजन हेतु प्रातः नांदी विधान देव, आचार्य आज्ञा के बाद कलश यात्रा निकाली गई ध्वजारोहण के बाद मंडप शुद्धि पंडित कीर्तिय शास्त्री के निर्देशन में की गई।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
