विरोधी का प्रतिकार करना ज्ञानी का कार्य नहीं है अजित सागर महाराज
दमोह
पूज्य मुनि श्री अजित सागर महाराज ने वसुंधरा नगर मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा की विरोधी का प्रतिकार करना ज्ञानी का कार्य नहीं है अज्ञानी विरोध करता है और अपनी ऊर्जा को नष्ट करता है, अज्ञानी जवाब देता। उन्होने अपने उद्बोधन मे कहा मानव की मान की कषाय जब चरम पर होती हैं तो महाविनाश होता है। साथ-साथ विनाश का रास्ता भी बनता चला जाता है।
परमाणु बम विकास का परिचायक नही बल्कि महाविनाश का कारण है मुनि श्री
मुनि श्री ने परमाणु बम के विषय मे कहा की परमाणु बम कभी भी विकास का परिचायक नहीं, बल्कि महाविनाश का कारण है। उन्होंने कहा जो ज्ञान दुख का कारण हो वह विनाशकारी होता है, जो सुख का कारण होता है वह सच्चा ज्ञान होता है, पाप के क्षेत्र में विकसित ज्ञान निरर्थक होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
