आचार्य विराग सागर महाराज का जन्मस्थली आगमन उमडा जनसेलाब

धर्म

आचार्य विराग सागर महाराज का जन्मस्थली आगमन उमडा जनसेलाब

पथरिया

रविवार को आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज का संघ सहित उनकी जन्मभूमि पथरिया मे मंगल आगमन हुआ जहा भक्ति श्रद्धा का जनसेलाब आगवानी हेतु उमड़ पड़ा। जेसे ही उनका आगमन नगर मे हुआ  वह  अपनी बचपन की स्मृति को प्रत्यक्ष देख प्रसन्न मुद्रा मे दिखाई दिये।

गुरुवर के बचपन व जीवन को साँझा किया उनके मित्र अरविन्द चोरासिया ने

जब पूज्य गुरुदेव का मंगल आगमन हुआ तो उनके बचपन के मित्र रहे वह सभी वह सभी आगवानी करते हुए जय जयकारा करते हुए दिखाई दिये। व भाव विभोर दिखाई दिये। पूज्य गुरुदेव के बचपन के मित्र रहे अरविन्द चोरासिया ने उनके बचपन व जीवन को साँझा किया उन्होने बताया संत विराग सागर महाराज बचपन से ही धार्मिक एवं होशियार प्रवृत्ति के थे।  पथरिया नगर में कक्षा पांचवी तक नगर पंचायत के पास बने बाल मंदिर स्कूल में उन्होंने अध्ययन किया। वह बताते है की हम लोगों के साथ ही बचपन में कक्षा पांचवी तक पढ़े हैं। वह बचपन से ही बड़े कलाकार और पढ़ाई-लिखाई में आगे व धार्मिक प्रवृत्ति के थे।

उनके शौक

उन्होने कहा की इनको गणेश जी की मूर्ति बनाने का उन्हें बहुत शौक था। वह बताते है की हम लोग मिट्टी लेकर आते थे और हमारी आटे की चक्की पर बैठकर विराग सागर महाराज बड़े ही लगन के साथ गणेश जी की मूर्ति बनाया करते थे।  हम लोग उनके साथ कक्षा पांचवी तक ही साथ पढ़ सके।  इसके बाद वह कटनी चले गए।  कटनी में जैन बोर्डिंग स्कूल में अध्ययन किया और वहीं से सन्मति सागर जी महाराज की दीक्षा लेकर संत हो गए। उनके साथियों ने बताया कि हम लोगों को भी यह देखकर प्रसन्नता होती है कि आज हमारे मित्र एक बहुत बड़े संत बन चुके हैं और पथरिया का नाम रोशन कर रहे हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

 

 

 

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