वाणी सिद्ध समाधिस्थ मुनि श्री गुण सागर जी का 14 वा अंतर विलय समाधि वर्ष भक्ति भाव पूर्वक आचार्य इंद्र नंदी जी महाराज संघ सानिध्य में मनाया गया
चकवाडा फागी
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य धर्म सागर जी के सुयोग्य प्रभावक शिष्य समाधिस्थ मुनि श्री गुण सागर जी महाराज का 14 वा समाधि वर्ष पूर्ण भक्ति भाव से आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज के संघ सानिध्य में मनाया गया। महेंद्र पाटनी उरसेवा किशनगढ़ और नवीन जैन ने बताया कि इस अवसर पर किशनगढ़ ,अजमेर फागी ,जयपुर निकटवर्ती नगरों से काफी भक्त पधारे। धर्म गुणामृत ट्रस्ट चकवाडा द्वारा आयोजितइस कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों द्वारा ध्वजारोहणकर चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।

राजस्थान शासन के उप मुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बेरवा विशेष रूप से उपस्थित हुए । मुलनायक भगवान का महामस्तकाभिषेक संपन्न हुआ। अतिथियों ने मंदिर ओर मुनि श्री गुण सागर की प्रतिमा के दर्शन कर चरण चिन्हों की वंदना अर्चना की आचार्य श्री इन्द्रनंदी से आशीर्वाद प्राप्त किया श्री शांतिनाथ मंडल विधान की पूजन पश्चात आचार्य श्री एवं मुनि श्री गुण सागर जी की पूजन भक्ति भाव नृत्य पूर्वक की गई। चकवाडा मंदिर ट्रस्ट की ओर से राजनीतिक अतिथियों का नगर की परंपरा अनुसार श्रीफल पगड़ी शाल माला , प्रतीक चिन्ह के साथ भावभीना स्वागत किया गया।
सामान्य परिचय

मुनि श्री गुण सागर जी महाराज का पूर्व नाम राजमल था आपने आपका जन्मसन 1939 में हुआ 30 वर्ष की उम्र में 24 फरवरी 1969 को श्री महावीर जी में आचार्य धर्म सागर जी से छूल्लक दीक्षा ग्रहण की ।
इसके पश्चात 8 दिसंबर 1974 को दिल्ली में आपने आचार्य श्री
धर्म सागर जी से मुनि दीक्षा ग्रहण की । 8 जनवरी 2011 पोश शुक्ल चतुर्थी को चकवाडा में आपकी उत्कृष्ट समाधि हुई। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के द्वारा फरवरी 2016 में चकवाडा में श्री जी का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं समाधि मंदिर में प्रतिमा और चरणों की स्थापना की गई।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
