जीवन के अंतिम क्षणों में लग्जरी कार नहीं णमोकार महामंत्र ही काम आएगा मुनि श्री अजित सागर महाराज

धर्म

जीवन के अंतिम क्षणों में लग्जरी कार नहीं णमोकार महामंत्र ही काम आएगा मुनि श्री अजित सागर महाराज
बागीदोरा
परम पूज्य मुनि श्री 108 अजित सागर महाराज का संध्या की बेला में बड़ोदिया से मंगल विहार हुआ मंगल विहार से पूर्व आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में महाराज श्री ने कहा कि जब भी जिनेंद्र प्रभु की शरण में आओ तो ऐसी भक्ति करो कि भक्ति करते समय संसार से राग छूट जाए ओर प्रभु की चरण में ही सच्चा सुख दिखे। मंदिर में आकर संसार सुख की कामना करना यह सब मन को इतना चंचल बना दिया है की शरीर मंदिर में रहता है, मंदिर में माला जपता हैं, पर मन कहीं और भटकता है,तो ऐसी पूजा, भक्ति कभी भी फलदाई नहीं होगी।

 

महाराज श्री ने आगे कहा कि जब भी मंदिर आओ तो उतने समय के लिए संसार सुख की कामना छोड़कर आया करो और भगवान की जिन मुद्रा को ही निहारते रहो। चिंतन करो कि प्रभु इस संसार के मकड़ जाल से कब बाहर निकाल कर वैराग्य धारण कर अपने मनुष्य पर्याय को धन्य करें।


मंगल विहार कर पूज्य मुनि श्री का मंगल प्रवेश बागीदोरा में हुआ। नगर में पहुंचने पर शक्ति नगर स्थित कीर्ति स्तंभ पर समाज बंधुओ ने महाराज श्री संघ की मंगल अगवानी की एवं पद प्रक्षालन किया। महाराज श्री ने शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचकर मूल नायक शांति नाथ भगवान के दर्शन किए।

 

 

इसके बाद हुई धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री 108 अजित सागर महाराज ने वर्तमान में मनुष्य के विलासिता और आधुनिक चकाचौंध में डूबे जीवनचर्या पर कहा कि यह आराम और सुविधाएं मात्र क्षणिक है।

उन्होंने कहा कि यह आधुनिक साधन जैसे लग्जरी लाइफ और कार जीवन के अंत में काम नहीं आएगी बल्कि णमोकार महामंत्र ही आत्मा के उद्धार के लिए काम आएगा। उन्होंने आगे कहा कि पुराने जमाने के लोग पढ़े लिखे कम थे लेकिन समझ, सहनशील, और विवेकी ज्यादा थे।

 

 

वर्तमान में उल्टा हो गया है पढ़े लिखे ज्यादा है लेकिन सांसारिक ज्ञान वह सहनशीलता कम है। पिछला 2024 साल तो बीत गया लेकिन आने वाला वर्ष 2025 को सदकार्य करे। खाना पीना तो जानवर भी करते हैं। इसलिए आत्मा के कल्याण के लिए धार्मिक कार्यों में आगे आए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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