पंचकल्याणक महोत्सव है,पत्थर को परमात्मा बनाने का अनुष्ठान मुनि श्री हितेंद्र सागर महाराज एवम आर्यिका 105महायशमति माताजी

धर्म

पंचकल्याणक महोत्सव है,पत्थर को परमात्मा बनाने का अनुष्ठान मुनि श्री हितेंद्र सागर महाराज एवम आर्यिका 105महायशमति माताजी
सलूंबर

दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित 5 दिनों में पंच कल्याणक महोत्सव बहुत ही भव्य रुप से ऐतिहासिक संपन्न होगा। पंचकल्याणक क्यों मनाया जाता है आइए इस बारे में हम कुछ जानने का प्रयास करें।

पत्थर को परमात्मा बनाने का अनुष्ठान है पंचकल्याणक ,आत्मा को परमात्मा बनने की सत्य घटना है,

 

पंचकल्याणक ,पतित को पावन करने का साधन है पंचकल्याणक ,तीर्थकर प्रभु की कथा करने के निमित्त है पंचकल्याणक ,इंसान को जीवन जीने की कला सिखाने का नाम है पंचकल्याणक ,धर्म की महिमा बताने का हेतु है।

 

 

आचार्य श्री के संघस्थ शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम् आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने बताया कि पंचकल्याणक में 5 संख्या है ।कल्याणक का अर्थ चारों निकाय के देवों द्वारा विशेष पूजन करना जो आत्मा तीर्थंकर पद को प्राप्त करने वाली है उनके तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का यह महत्व है कि देवों के द्वारा पूजा जाना संसारी आत्मा से अलग विलक्षणता बताना।श्री आदिनाथ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति केप्रभुलाल दोषी,सेठ लक्ष्मीलाल ढालावत,सेठ ललित कुमार भिमावत,मनोहर लाल ढालावत
शांतिलाल गुनावत द्वारा जानकारी प्रदान की गईं
पत्थर भी पूजनीय


पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हो जाने पर पत्थर भी तीर्थंकर तुल्य पूजनीय हो जाते हैं पंचकल्याणक के संस्कारों से संस्कारित प्रतिमाओं की भक्ति, पूजा, ध्यान करने का महत्व या फल साक्षात तीर्थंकरों की पूजा करने के समान होता है।

पंचकल्याणक के अंतर्गत 5 कल्याणक में पहले तीर्थंकर बालक का गर्भ में अवतरण होता है,फिर जन्म,तप फिर केवल ज्ञान और मोक्ष कल्याणक होता है।इस प्रकार 5 कल्याणक होते हैं महत्वपूर्ण यह है कि तीर्थंकर का नियम है कि यह देव गति या नरक गति से चल कर आते हैं,मनुष्य या तिर्यंच गति से नही आते है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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