5 क्विंटल सागवान की लकड़ी से निर्मित तीन मंजिला काष्ठ रथ एवीएस परिवार द्वारा आज वीरोदय तीर्थ क्षेत्र को किया जाएगा समर्पित
बांसवाड़ा
5 क्विंटल सागवान की लकड़ी से बना तीन मंजिला काष्ठ रथ एवीएस परिवार द्वारा वीरोंदय तीर्थ क्षेत्र को भेंट किया जाएगा।
काष्ठ रथ की विशेषताएं
आपको बता दें हर जिनालय या तीर्थ से भगवान रथ पर सवार होकर ही नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं, लेकिन इस काष्ठ रथ की विशेषताएं हैं जो अपने आप में से सबसे विशेष एवं अलग बनाती है। यह रथ चतुष्कोणीय है। तीन मंजिला इस रथ की ऊंचाई 15 फीट लंबाई 11 फीट और चौड़ाई साढे 5 फिट है। रथ के चार-चार द्वार और द्वारपाल हैं। रथ पर हाथी घोड़ा बंदर और अन्य प्राणियों के चित्र अंकित हैं जो जीव दया का एक अकाटय प्रमाण परिलक्षित करते हैं। इस रथ पर लोहारिया के शिल्पियों ने जिन परंपरा के अनुसार तीर्थंकरों की माता के 16 सपनों, मुनि महाराज के चित्र उकेरे है। स्तंभ भी बनाए हैं।
इतना ही नहीं चारों ओर मनमोहक कठपुतलियां नृत्य की मुद्रा में दिखाई देती हैं हाथी के आकर्षक चित्र और तोरण द्वार भी भव्य
हैं। काष्ठ की बारीकी और कलात्मक शैली को शिल्पियों ने जाजी में उकेरा है। 
रथ पर पर पहरेदारी करते दो ऐरावत हाथी,भगवान बाहुबली
परस्परोपग्रहों जीवानाम चिन्ह चांदी के पांच छत्र प्रत्येक मंजिल पर चार-चार झरोखे, जिसमें दोनों और काले हाथी पर बैठे

महावत, रथ के दोनों और अपने पंख फैलाए खड़े मोर, नाव और शेर आमने-सामने 1 वॉट पर अंकित कर बताया जा रहा है की जियो और जीने दो के संदेश भगवान महावीर स्वामी ने यही बताया है गाय और शेर एक घाट पर पानी पीते हैं। इस रथ को बनाने में 8 महीने का समय लगा। सात रंगों के 21टोन में तैयार किया है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
