भावनायोग”तन को तो स्वस्थ करता ही है,यह मन को भी मस्त कर आत्मा को पवित्र बनाता है, प्रमाण सागर महाराज

धर्म

भावनायोग”तन को तो स्वस्थ करता ही है,यह मन को भी मस्त कर आत्मा को पवित्र बनाता है, प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
“जो मेरे भीतर शुद्ध परमात्मा है वह मैं हुं” जो इस “भावना” का शुद्ध भाव से ध्यान करता है,वह सम्यक्दर्शन ज्ञान चारित्र को प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में “भावनायोग” कराते हुये छत्रपति नगर दलालवाग में व्यक्त किये।

 

 

मुनि श्री ने कहा “भावनायोग”तन को तो स्वस्थ करता ही है,यह मन को भी मस्त कर आत्मा को पवित्र बनाता है,इसके नियमित प्रयोग से केंसर जैसे रोग पर भी विजय प्राप्त की जा चुकी है। ऐसे कई उदाहरण सामने आए है मै तो यंहा तक कहता हुं कि नियमित भावनायोग करने वालों की “अकालमृत्यु” नहीं होगी, इससे इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है तथा खोया हुआ आत्मविश्वास बढ़ता है। यह प्रमाणित हो चुका है जिन लोगों ने नियमित भावनायोग किया उनके विचारों में सकारात्मकता आई,तथा नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिली,उन्होंने कहा कि आप लोग गुरु से आशीर्वाद लेते हो और आपका मन प्रसन्न हो जाता है यह क्या है? यह भी हमारे अवचेतन मन पर पड़ने वाला एक प्रभाव ही तो है,अवचेतन मन पर आशीर्वाद से अंतः स्रावी ग्रंथियां में परिवर्तन आता है तो हमारे अंदर उत्साह और नवऊर्जा का संचार होता है,तथा आनंद की अनुभूति होती है,और सभी कार्य सहज में होते चले जाते है।

 

उन्होंने आशीर्वाद की चर्चा करते हुये कहा कि हमारे अंदर जितनी भी मनोविकृतियां है यहा तक कि जो लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित होकर आत्महत्या की भावना तथा अनिद्रा जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाते है उन्हें इन बीमारियों से मुक्ति मिली है। मुनि श्री ने एक प्रयोग कराते हुये कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति सभा में नहीं होगा जिसे कभी गुस्सा नहीं आया हो अथवा किसी के गुस्से का शिकार ना बना है जिन लोगों को बात बात पर गुस्सा आता हो ऐसे लोगों को नियमित भावनायोग करना चाहिये “मुझे शांत रहना है” इस एक बोध वाक्य ने लोगों की जिंदगियां बदल दी उन्होंने कहा कि “मुझे शांत रहना है” का बोधवाक्य जब हम बारबार
दोहराते है तो उसका असर हमारे अवचेतन मन पर पड़ता है और धीरे धीरे हमारा गुस्सा शांत हो जाता है,उन्होंने कहा कि ऐसे कही प्रमाण सामने आए है, अनेक लोग जो प्रचंड क्रोधी थे वह शांतमूर्ति बन गए। सभा में यदि कोई हों तो वह भी नियमित 90 दिन का अभ्यास करें तो उनके जीवन में वह भी व्यापक परिवर्तन महसूस करेंगे।

उन्होंने कहा कि “भावनायोग” से जिन बच्चों का पढ़ने में मन नहीं लगता था उन विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ी और आत्मविश्वास के साथ परफॉर्मेंस मजबूत हुआ वह नीट तथा आईआईटी जैसी परीक्षा में अच्छी रेंक के साथ उत्तीण हुये।

 

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया तेज ठंड का प्रभाव के बावजूद भी बहुत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुये भावनायोग के पश्चात “मंगलभावना” के साथ सभा का समापन हुआ।

दोपहर 1:30 शंका समाधान के उपरांत मुनि संघ का मंगल विहार छत्रपति नगर से रेवती रेंज की ओर हुआ रात्रि विश्राम सिद्ध विहार कॉलोनी में होगा।
15 दिसंबर रविवार को प्रातः नवीन जिनालय की आधारशिला रखने के पश्चात रेवती रेंज की ओर प्रस्थान करेंगे एवं आहारचर्या bhib यही संपन्न होगी। एवं यहीं पर दोपहर 1:00 बजे सहस्त्रकूट जिनालय की आधारशिला पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज संघ एवं पूज्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज संघ सानिध्य में रखी जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *