जो कर्म सिद्धांत को मानते हैं तो किसी भी घटना से प्रभावित नहीं होते हैं प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
आसक्ती”अज्ञान भाव को जन्म देती है,आध्यात्म हमें उन कष्टों में विचलित होने से बचाता है,तथा सहन शक्ति प्रदान करता है”जो कर्म सिद्धांत को मानते है वह किसीभी घटना से प्रभावित नहीं होते,उसे कर्मजन्य संयोग मानकर सहजता से स्वीकार करते है”उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने तिलकनगर में आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।
मुनि श्री ने कहा कि अंतरंग में सहजता, संतोष और
सकारात्मकता तथा सदाचार ये चार बातें आपके जीवन में आ गई तो आप सदाबहार और प्रसन्न बने रहोगे, गुरूदेव ने एक हायकू में बहुत अच्छा सूत्र दिया है*”किसको तजू भजू किसको, सबका साक्षी हो जाऊ” आज जो प्रतिकूल या अनुकूल दिख रहे है वह मेरे नहीं है, जो आया और गया वह भी मेरा नहीं सब कर्म जन्य संयोग है,यह साक्षी भाव मन में जग जाए तो जीवन का कायापलट हो जाए, कर्म सिद्धांत पर जिनका भरोसा होता है वह कभी कितनी भी बड़ी घटना घट जाए नहीं घबराते,उन्होंने कहा कि पल पल में विचलित होंने वाले लोग कभी सुखी नहीं रह सकते, घटनाऐं कर्माधीन है,उनको घटित होंने से नहीं रोक सकते। लेकिन आध्यात्म दृष्टि हमें उन घटनाओं से विचलित हो ने से बचाती है।
मुनि श्री ने एक सब्जी बेचने बाली महिला का उदाहरण देते हुये कहा उसका 28 वर्षीय जवान बेटा चला गया उसने दो दिन बाद अपनी टोकनी लेकर अपनी उसी मधुर मुस्कान के साथ जिस पर लोग फिदा हो जाते थे, सब्जी बेचना शुरु किया तो लोग आश्चर्य में पड़ गये और एक सज्जन ने उनसे पूछ ही लिया किअभी-अभी तो आपका जवान बेटा गया है फिर भी आपके चहरे पर वही मुस्कान है, जो पहले हुआ करती थी तो उसने जो जबाब दिया वह किसी आध्यात्मिक दृष्टि से कम नहीं था उसने कहा कि “मेरा और मेरे बेटे का बस इतना ही संयोग था मेरे रोने से तो वह आने वाला नहीं मुझे भी अपना जीवन चलाना है और यह मुस्कान ही मेरा जीवन है।

लेकिन जहा पर माल रखा था उस और चोरों की दृष्टि ही नहीं गयी और पूरा का पूरा वह सुरक्षित था। जहा छोटी छोटी बातों में लोग असहज हो जाते है, वहा एक तत्वज्ञानी ही स्थिरता रखता है,वह चीजों से प्रभावित नहीं होता।मुनि श्री ने कहा कि जहा पर लोग छोटी छोटी बातों से असहज हो जाते है वहीं इस सब्जी बेचने वाली महिला ने मेरी तत्वदृष्टी को जगा दिया। दूसरी घटना क्षु. गणेश प्रसाद वर्णी की है उन्होंने लिखा कि मेरी धर्म माता चिरोंजा बाई सोनागिर में सिद्धचक्र
महामंडल विधान करा रही थी, खबर मिली कि उनके घर बरुआ सागर में चोरों ने पुरा घर खोदकर सब सामान चुरा ले गये। सूचना को सुन में थोड़ा असहज हो गया लेकिन माता चिरोंजा बाई ने सुना और फिर भगवान की ओर देखा और बुदबुदाई कि भगवान जो चला गया सो चला गया जितना बचा होगा में उसी को अपना परिग्रह परिमाण मानूंगी वह विल्कुल भी विचलित नहीं हुई उन्होंने सहजता के साथ विधान पूरा किया दो दिन बाद जब घर पहुंची देखा तो पूरा घर खुदा हुआ था।



धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि इस अवसर पर कृष्णा पब्लिक स्कूल के संचालक शर्मा जी उपस्थित थे उन्होंने गुरुदेव के चरणों में कुछ और समय रुकने के लिये श्री फल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।मंच पर मीडिया प्रभारी राहुल स्पोर्ट्स, धर्म प्रभावना समिति केअध्यक्ष अशोक रानी
डोसी, महामंत्री हर्ष जैन, सचिन जैन उद्योगपति,मनोज अनामिका बाकलीवाल सहित छत्रपति दि. जैन मंदिर के अध्यक्ष सहित
समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पं.सुदर्शन जैन पिंडरई ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
