जो व्यक्ति खुद की कमाई से खुश नहीं होतावो कितना ही कमा ले इस जीवन में कभी सन्तुष्ट नहीं हो सकता.. आचार्य आचार्य प्रसन्नसागर महाराज
शिवनी मध्यप्रदेश
अंतरमना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कीजो व्यक्ति खुद की कमाई से खुश नहीं होता.वो कितना ही कमा ले इस जीवन में,कभी सन्तुष्ट नहीं हो सकता..!
उन्होंने कहा,,सभी लोग सुख का जीवन जीना चाहते हैं, पर सुख का जीवन जी नहीं पा रहे हैं।सुख की चाबी है मन का सन्तोष, भीतर की शान्ति, चेहरे की प्रसन्नता।
उन्होंने कहा लेकिन ये चीजें ऐसी नहीं है जो मॉल या मार्केट से खरीदी जा सके। ये तीनों चीजें स्वयं के पास है, लेकिन स्वयं को महसूस नहीं होती।कभी कभी लगता है कि बच्चों की तरह सरल, निश्छल जीवन जीना चाहिए। वो किसी से भेदभाव, छल-कपट नहीं करते। जो आया उससे, वैसा बोल लिया और जिसने जो
दिया वो खा लिया। हम अपने आप से पूछते हैं, आप भी अपने आप से पूछा करो — जीवन का उद्देश्य क्या है-? हम क्यों जीना
चाहते हैं-? मरना क्यों नहीं चाहते-?* जब हम चिन्तन के निष्कर्ष पर पहुंचते हैं, तब यही जवाब आता है — हमको सबसे खुश रहना




है, मन की शान्ति, चेहरे की प्रसन्नता, और भावों की विशुद्धि को रोज वर्धमान करना है। क्योंकि जिन्दगी के एक पल का भी भरोसा नहीं है।
सुख का मूल कारण है मन का सन्तोष और मन का आनंद…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
