पंचकल्याणक महोत्सव पुण्य का समुद्र है, यह जन-जन के लिए कल्याणकारी होता है मुनि श्री भावसागर महाराज
खिमलासा
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर खिमलासा में मुनि श्री विमल सागर महाराज, मुनि श्री अनंत सागर महाराज, मुनि श्री धर्म सागर महाराज, मुनि श्री भावसागर महाराज, मुनि श्री आदिसागर महाराज, क्षुल्लक श्री संयमसागर महाराज के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिष्ठित होने वाली प्रतिमाओं का आगमन हुआ। प्रभु की जयकारों से वातावरण गुंजयमान हो गया, वहा उपस्थित जन प्रतिमाओं को निहार रहे थे।
9से 16 दिसंबर तक होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव में भारत के कई नगरों से प्रतिमाएं आ रही हैं। दशहरा मैदान में 9 दिसंबर को दोपहर 1:00 बजे घटयात्रा संपन्न होगी। 10 दिसंबर को ध्वजारोहण प्रातः बेला में होगा गर्भकल्याणक पूर्व रूप की
क्रियाएं होगी 11 दिसंबर को गर्भ कल्याण उत्तर रूप की क्रियाएं होगी 12 दिसंबर की सुबह प्रभु का जन्म कल्याणक महोत्सव होगा और दोपहर की बेला में पिच्छिका का परिवर्तन समारोह होगा 13 दिसंबर को तप कल्याण, 14 दिसंबर को ज्ञान कल्याण में विश्व के प्रथम 24 समोसरण की प्राण प्रतिष्ठा होगी। 15
दिसंबर की सुबह मोक्ष कल्याणक संपन्न होगा विश्व शांति
महायज्ञ होगा दोपहर 1:00 बजे विशाल रथ की परिक्रमा होगी।


शनिवार की बेला में पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने पंचकल्याणक के विषय में कहा कि दुनिया का प्रथम स्थान है जहां पर 24 समवशरण के निर्माण हुए हैं। इसकी प्राण प्रतिष्ठा देखने के लिए लोग आतुर हैं, यह महोत्सव जन-जन के लिए कल्याणकारी होता है। लाखों वर्ष पूर्व प्रभु ने कैसे जन्म लिया, और कैसे ऊंचाइयों पर पहुंचे यह देखने को मिलता है। धार्मिक महोत्सव में पंचकल्याणक महोत्सव अपना सबसे ऊंचा स्थान रखता है। यह महोत्सव पुण्य का समुद्र है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
