अपना सौभाग्य है कि महावीर भगवान के शासन में हमारा जन्म हुआ मुनि श्री विमल सागर महाराज
घाटोल
श्री वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर घाटोल जिला बांसवाड़ा राजस्थान मे परम पूज्य सर्वश्रेष्ठ साधक
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य
मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ,मुनि श्री अनंत सागर जी महाराज, मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज, मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में 13 नवंबर को
प्रातःकाल की बेला में मुनिसंघ का चातुर्मास समापन हुआ।
प्रातः काल की बेला में अभिषेक, शांतिधारा ,पूजन, महावीर भगवान के मोक्षकल्याणक पर निर्वाण लाड़ू अर्पण किया गया ,चातुर्मास कलश प्रदान किये गए

निर्धन व्यक्तियों को मिठाई, वस्त्र, औषधि और अन्य वस्तुएं वितरित की गई इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमल सागर जी महाराज ने कहा कि 2549 वर्षों से परंपरा से निर्वाण महोत्सव मनाते आ रहे हैं, अपना सौभाग्य है कि महावीर भगवान के शासन में हमारा जन्म हुआ, आज के दिन महावीर भगवान मोक्ष गए थे , पर्व हम सभी को पवित्र करते हैं, यह पवित्रता का दिन है ,लोग मकान ,दुकान की सफाई करते हैं , यह पर्व अंतरंग की सफाई का है ,जीवन रूपी महल की सफाई करें ,जो प्रतिदिन प्रभु का अभिषेक , पूजन ,दान करते हैं ,नियम ,संयम से बंधे हुए हैं वह आत्मा की सफाई करते हैं, जो यह कार्य करते हैं उसकी प्रतिदिन दिवाली है ,आज हम लोगों को चातुर्मास से मुक्ति मिल गई है, यह चातुर्मास निर्विघ्न साधना के साथ संपन्न हुआ ,

आगे के कार्यक्रम बाकी है ,यह चातुर्मास बड़ी-बड़ी उपलब्धियां के साथ संपन्न हुआ ,नवीन वेदी पर वासुपूज्य भगवान विराजमान होना हैं ,ऐसा सौभाग्य हाथ से जाने नहीं देना, 900 वर्ष से अधिक प्राचीन श्री वासुपूज्य भगवान है यहां ,भारतवर्ष की अद्वितीय वेदी बनी है ,जो प्रभु को विराजमान करेगा ,वह सौभाग्यशाली होगा , चूकना नहीं लाभ लेना विराजमान करने का ,पटाखे नहीं फोड़ने का संकल्प लें, वाद्य यंत्र खरीद कर बजाए, थाली बजाए झालर बजाए, महावीर स्वामी ने बाहरी संपदा छोड़ी और अंतरंग संपदा की प्राप्ति हुई ,ज्ञान का दीपक जलना चाहिए।


















18 नवंबर को 15 वर्षो बाद मानस्तभ की 8 प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक , शांतिधारा, पूजन होगी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
