गुटका, सिगरेट, हुक्का, पान मसाला मादक पदार्थों का यदि आपका त्याग नहीं है तो आप सच्चे अर्थों में जेनी ही नहीं प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
गुटका सिगरेट, हुक्का पान मसाला मादक पदार्थों का यदि आपका त्याग नहीं है, तो आप सच्चे अर्थों में जैनी ही नहीं हो नाम मात्र के जैनी हो” यदि आप अपने अंदर के यह व्यसन नहीं छोड़ पा रहे हो तो आप कितने कमजोर हो?लालबत्ती में अपनी गाड़ी को दौड़ा रहे हो तुम्हारी आत्मा का तो पतन होगा ही होगा और यदि कोई गम्भीर बीमारी ने जकड़ लिया तो तुम भी मरोगे और परिवार भी तबाह होगा” क्या तुम अकाल मौत मरना चाहते हो? या कुत्ता की मौत मरना? अथवा नरक निगोद में जाकर सड़ना चाहते हो?
उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने वैभवनगर में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव के तीसरे दिवस “जन्म कल्याणक” के अवसर पर प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये मुनि श्री ने कहा कि क्या यह समझदारों का पागलपन नहीं तम्बाकु, गुटखा आदि नशीले पदार्थों के पाऊच पर “बि च्छू” का चित्र बना होता है और लिखा होता है कि गुटका खाने से केंसर होता है फिर भी आप खा रहे है तो यह समझदारों का ही पागलपन कहलाएगा। “
जानबुझकर अंध बने है, आंखन बांधी पाटी, जिया धोखे की
टाटी” संत कहते है-“चेतो जागो और निद्रा त्यागो” आप लोगों ने भगवान के जन्म का जश्न तो मना लिया लेकिन ध्यान रखना जन्म के जश्न के साथ साथ मौत का मातम भी जुड़ा होता है,इधर सूरज ऊगा है तो उधर सूरज के डूबने का परिदृश्य भी सामने दिखना चाहिये।
मुनि श्री ने कहा कि यह जीवन मिला है, मात्र दो दिन का? गुनगुनाते हुये कहा “दुनिया में रहने वाले तुझको यह खबर है,दो दिन की जिंदगी है पलभर का यह सफर है” किसी ने लिखा था अचानक याद आ गया “कोताहियां तो देखिये इस हाल में फनांकि, दो दिन की जिंदगी में,एक मौत का भी दिन है” काश इस सत्य को हम स्वीकार पायें और अपने दोषों को अपनी
दुर्बलता को दूर करें तो जीवन सोना बन जाए। मुनि श्री ने कहा कि आज “भगवान” ने जन्म लिया एक शिशु के रुप में,वह साधना के पथ पर वह आगे बढ़े,और भगवान बन गये” जैन धर्म कहता है कि आत्मा ही परमात्मा है,साधारण प्राणी भीअसाधारण कार्य कर सकता है, भगवान कहते है जो में हुं, वही तुम हो, जहा में हुं वहा तुम हो, नर जन्म मिला है तो इसी जन्म में अपने आत्मकल्याण की ललक जागना चाहिये ।उन्होंने कहा कि दान पुण्य से तुम्हारा उद्धार नहीं होगा “व्रत संयम तप को धारण करोगे तभी तुम्हारा उद्धार होगा” उन्होंने कहा कि मुनि धर्म का पालन नहीं कर सकते कोई बात नहीं कम से कम सदग्रहस्थ तो बन जाओ?

इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेगसागर जी एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित संघ विराजमान था।धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया वैभवनगर में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव के तीसरे दिवस भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव मनाया गया। नाट्य मंचन में इंद्रसभा लगी जिसमें देवराज इंद्र का आसन कम्पायमान हुआ और जानकारी मिली कि आयोध्या नगरी में राजा नाभीराय के यहा ऋषभदेव का जन्म हुआ है चारों और खुशियों का
वातावरण छा गया देवराज इंद्र अपनी रानी शचि और संपूर्ण इंद्र अपनी इंद्राणियो के साथ राजा नाभीराय के यहा भेंट लेकर पहुंचे एवं बधाई दी। प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया एवं नितिन भैया अमित वास्तु सहित कलाकारों कार्यक्रम को गति प्रदान की। मंच से घोषणा की गई जन्मकल्याणक के इस अवसर पर जो भी राशी आएगी वह जीवदया के लिये गौशाला में जाएगी। महापात्र एवं सामान्य इंद्र इंद्राणियो ने खुलकर दान दिया। 10 बजे अनुष्ठान स्थल वैभवनगर से उदयनगर दि. जैन मंदिर तक जन्माभिषेक का जुलुस निकाला गया जिसमें ऐरावत हाथी पर सौधर्म इंद्र कुमार ऋषभदेव को लेकर चल रहे थे तथा 22 बग्गीओं पर सवार राजा महाराजा तथा इंद्र परिवार था। पांडुकशिला पर जन्माभिषेक हुआ इस अवसर पर सौधर्म इंद्र अनिकेत जैन के पश्चात संदीप गंगवाल, सचिन उद्योगपति एवं नितिन अजमेरा यू एस ए. वालो को अभिषेक करने का सौभाग्य मिला। इस अवसर पर बहूत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जन्माभिषेक किया।
धर्मसभा में पंचकल्याणक संयोजक हर्ष जैन, अध्यक्ष अशोक डोसी,नवीन गोधा, मीडिया प्रवक्ता अविनाश जैन, प्रभारी राहुल जैन जुलूस संयोजक जिनेश झांझरी पवन सिंघई, तथा बड़ी संख्या में उदयनगर जैन मंदिर के पदाधिकारियो के साथ -धर्म प्रभावना समिति , सकल जैन समाज इंदौर, गोकुल नगर , वैभव नगर , उदय नगर , गोयल नगर , तिलक नगर , ग्रेटर ब्रजेश्वरी, संविद नगर , सुखशांति नगर एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के जिनालयों से बड़ी संख्या में श्रदालु मौजूद थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
