डिग्री लेना जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए आदित्य सागर महाराज
अशोक नगर
सुभाषगंज दिगंबर जैन मंदिर में मुनि संघ के प्रवचन हुए मंगल प्रवचन देते हुए सर्वप्रथम अरह सागर महाराज ने कहा की आनंद से जीवन जीना चाहते हो,तो जैसे हैं उसमें सुखी रहना और संतोष करना सीख लो। संसार में दो तरह के लोग होते हैं एक अच्छाई में बुराई देख लेते हैं और दूसरे बुराई में भी अच्छाई देख लेते हैं। आपको क्या पसंद है, आप स्वयं निर्णय कर सकते हैं। जो बुराई में भी अच्छा ही देख लेते हैं, उनका जीवन ऊंचाइयों को छूने लगता है और जो अच्छाई में बुराई ढूंढते हैं वह अपना समय व अर्थ दोनों गवा देते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें शिकायतों से भरकर जीवन नहीं जीना है, हमें शिकायतों से रहित जीवन को देखना है वस्तु के सदभाव में वस्तु की कीमत समझ में नहीं आती। अभावों में हमें वस्तु की कीमत समझ में आती है।
इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने शिक्षा का
महत्व बताते हुए कहा कि आज व्यक्ति क्या खा रहा है कब खा रहा है कैसे खा रहा है उसका भी ज्ञान नहीं है पहले तो भोजन के साथ भजन और फिल्मी गीतों में भी संदेश छुपे होते थे जिन्हें श्रोता गीतों को सुनते सुनते ग्रहण कर लेते थे। आज क्या गाया जा रहा है गाने वाले को भी पता नहीं। सुनने वाले क्या समझे और क्या सीखेंगे। हम बुद्धिमानी का काम करें। डिग्री के पीछे ना भागे। डिग्री लेना जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा का अर्थ जीवन को सुधारना होगा तो जीवन अच्छा बनेगा। हमें रास्ता पता नहीं तो हम आगे नहीं बढ़ सकते। पहले रास्ते को जाने फिर आगे बढ़ते जाए।

मुनि श्री सहजसागर महाराज के विषय में कहा कि बहुत सीधे साधे सादे है, उनका नाम सहज है उनके जीवन में सहजता स्पष्ट झलकती है यही साधु जीवन की विशेषता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
