दर्शन सागर महाराज की देह पंचतत्व में विलीन
सुसनेर
पूर्व आचार्य दर्शन सागर महाराज की संलेखना पूर्वक समाधि 1 दिसंबर की संध्या बेला में 5:05 पर हुई थी। सोमवार की बेला में सुसनेर स्थित त्रिमूर्ति जैन तीर्थ से उनकी डोल यात्रा निकाली गई।
जैन दर्शन में संलेखना पूर्वक समाधि को महोत्सव के रूप में मनाया जाता है मंदिर परिसर में जैसे ही मुनिराज की डोल को भक्तों ने कंधों पर उठाया पूरा परिसर पूरा मंदिर परिसर जय जयकारों की गूंज से गूंज रहा था। यात्रा में संदीप कुमार राकेश
कुमार दिल्ली का परिवार मुनि श्री के कमंडल से जलधारा से पवित्र करते हुए मार्ग पर चल रहा था। उन्हें लकड़ी के एक तख्ते पर प्रार्थना मुद्रा में बिठाया गया। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में शहर सहित आसपास के कई नगरों के भक्त मौजूद रहे।

त्रिमूर्ति परिसर में विधि विधान से चंदन की लकड़ियों और नारियल से उनकी अंतिम क्रियाएं की गई अंतिम क्रिया के समय भक्त जनों ने उनकी परिक्रमा की मुनि श्री के गृहस्थ जीवन के भाई वह परिवारजन भी मौजूद रहे। अंतिम यात्रा के दौरान नगर वासियों ने अपने प्रतिष्ठान भी बंद रखें और महाराज श्री को भावभीनी विदाई दी। इसी के साथ दर्शन सागर दिगंबर जैन ज्ञान मंदिर स्कूल सहित अधिकांश निजी स्कूलों ने सोमवार को अवकाश रखा।
पूज्य दर्शन सागर महाराज कई समय से अस्वस्थ चल रहे थे 9
अप्रैल 1972 को दिल्ली के समीप अतिशय क्षेत्र तिजारा में उनकी दीक्षा हुई थी। 13 मार्च 1973 को राजस्थान के बूंदी में आचार्य श्री निर्मल सागर महाराज द्वारा उन्हें मुनि दीक्षा प्रदान की गई 13 अप्रैल 1973 को उन्हें गणधर पद सांगोद राजस्थान में प्राप्त हुआ। उसके उपरांत वे सुसनेर पधारे सन 1973 में ही पूज्य श्री सुसनेर आ गए थे और उन्होंने अपनी संत साधना यही पूर्ण की।
पूज्य मुनि श्री की डोल यात्रा त्रिमूर्ति जिन मंदिर पहुंचने पर चंद्रकला जैन इंदौर एवं परिवार वालों ने आचार्य श्री की पूजन की एवं उन्हें अर्घ समर्पित किए। एवं उसके उपरांत उनका जल से अभिषेक किया गया पूजन उपरांत शांति पाठ एवं अन्य धार्मिक क्रियाएं पंडित शांतिलाल जैन आगरा पंडित नितिन झांझरी इंदौर मुकेश जैन सुसनेर द्वारा संपन्न कराई गई महाराज श्री को मुखाग्नि संदीप कुमार भेरूलाल जैन सुसनेर एवं राकेश कुमार जैन नेमीचंद जैन नई दिल्ली परिवार के द्वारा दी गई। मंत्र उच्चारण के साथ केअंतिम क्रियाएं की गई। राकेश जैन दिल्ली के द्वारा अंतिम संस्कार स्थल का निर्माण कराया जाएगा अंतिम क्रियाएं पूरे विधि विधान के साथ की गई। और पुलिस व्यवस्था ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त रही।

यदि हम गौर करें तो महाराज श्री ने जैन समाज को शिक्षा में अन्य कारोबार से लेकर कई क्षेत्रों में उन्नति दिलाए सुसनेर में आचार्य श्री दर्शन सागर ज्ञान सागर स्कूल के नाम से ही प्राइवेट ट्रस्ट एवं स्कूल संचालित है जो की महाराज श्री की प्रेरणा से जैन समाज द्वारा संचालित किया जा रहा है। उज्जैन झालावाड़ हाईवे पर स्थित त्रिमूर्ति जैन मंदिर जिसे दर्शन सागर तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है इसका निर्माण भी पूज्य मुनि श्री की प्रेरणा से ही हुआ था।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
