हो सकता हैं मेरी लिखी हुई बातों को पड़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति न समझ सकें,,क्योंकि में भावनाओं को लिखने का प्रयास करता हूं और लोग केवल शब्द पड़ते हैं श्रीश जैन ललितपुर की कलम से

धर्म

हो सकता हैं मेरी लिखी हुई बातों को पड़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति न समझ सकें,,क्योंकि में भावनाओं को लिखने का प्रयास करता हूं और लोग केवल शब्द पड़ते हैं श्रीश जैन ललितपुर की कलम से
भाग्योदय तीर्थ सागर में चल रहे श्रावक संस्कार शिविर को लेकर श्रीश जैन ललितपुर भाव अभिव्यक्ति प्रकट करते हुए कहते हैं कि आज प्रातः जब मैने पुण्योदय चैनल पर आने वाले प्रसारण को देखा तो ज्ञात हुआ कि श्रावक संस्कार शिविर में जगत पूज्य ह्रदय सम्राट मुनि पुंगव निर्यापक श्रेष्ठ मुनि श्री 108सुधासागर जी महाराज आज उत्तम तप के दिन प्रत्येक शिविरार्थियो के मस्तिष्क पर पावन गंधोदक लगा रहें हैं।

 

 

वह कहते हैं कि मैं इस बात की कल्पना मात्र से रोमांचित हो उठा कि गुरुदेव 5000 शिविरार्थियो के मस्तिष्क को मात्र इसलिए पावन कर रहें हैं क्योंकि वे अपने घर परिवार और उपकारी भावों को छोड़कर यहां साधना करने आए हैं और पूज्यवर उनके मुनि बनने की मंगल कामना कर रहें हैं मगर अगले ही पल मन में यह विचार भी आया कि 5000 शिविरार्थियो के मस्तिष्क पर गंधोदक लगाने में कितना शारीरिक श्रम करना पड़ेगा।

मुझे नही लगता कि कोई भी सामान्य पुरुष किसी ठसाठस भरे पांडाल में खड़े 5000 पुरुषो के पास जाकर उनके मस्तिष्क पर सिर्फ हाथ भी रखकर 2 घण्टे में लौट कर आ सकता हैं फिर मेरा

 

 

 

 

मन गौरवांवित हो उठता हैं कि मेरे गुरुदेव के तप में इतनी शक्ति हैं कि वे हाथों में गंधोदक लेकर 5000 शिविरार्थियों के पास जाते हैं और उनके मस्तिष्क को पावन करते हैं आज का यह द्र्श्य देख मेरी आंखों से आंसू झलक उठे क्योंकि परिवार में किसी बालक के जन्म की खुशी की खबर आने से दस दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान से दूर रहना पड़ रहा हैं वरना में भी आज गुरुदेव के चरणों की रज मस्तिष्क पर लगा रहा होता।

 

पूज्य गुरुदेव ने सभी शिविरार्थियो के पुण्य की अनुमोदना करते हुए कहा कि जिन वस्तुओं को पाकर संसार सुख मानता हैं उसके उलट शिविरार्थी अगर उन वस्तुओं को त्याग कर सुखी हैं वही उत्तम तपधारी हैं वे मुनि बनने की तपस्या कर रहें हैं और पूज्यवर की भावना के अनुसार इसी भव में अथवा अगले भव में वे सभी मुनि बनकर अपना कल्याण करेंगे,, में पूज्यवर के अद्भुत सामर्थ्य की भूरी भूरी प्रशंसा करता हूं और भावना भाता हूँ कि परमपिता परमात्मा आदिनाथ भगवान पूज्यवर को अनंत बल शक्ति और साधनाओं में सर्व श्रेष्ठ बनाएं
पूज्यवर का आशीर्वाद सदा बना रहे इसी मंगल भावना के साथ

लेखन श्रीश ललितपुर 
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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