समाज में सक्रिय भूमिका अदाकर कार्य करना चाहिए मुनिश्री नीरज सागर महाराज
कोटा
परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 नीरज सागर महाराज एवं पूज्य मुनि श्री 108 निर्मद सागर महाराज का सोमवार की प्रातः बेला में आरके पुरम त्रिकाल चौबीसी मंदिर में प्रातः की की बेला में प्रवेश हुआ।
परम पूज्य मुनि संघ ने सोमवार प्रातः महावीर नगर प्रथम से मंगल विहार किया मंगल विहार से पूर्व पूज्य मुनि श्रीसंघ के सानिध्य में अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। पूज्य मुनि संघ

मंगल विहार करते हुए अहिंसा सर्किल आरकेपुरम आए जहां पर समाज बंधुओ ने पूज्य मुनि संघ की मंगल अगवानी की एवं जय जय कारों के साथ जगह-जगह पद प्रक्षालन और मंगल आरती की। जय जय कारों के बीच महाराज श्रीसंघ को त्रिकाल चौबीसी जिन मंदिर लाया गया त्रिकाल चौबीसी मंदिर पहुंचने पर महाराज श्री संघ ने मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ भगवान की प्रतिमा एवं त्रिकाल चौबीसी मंदिर के दर्शन किए। इस अवसर पर श्रीजी की शांति धारा की गई एवं शांति धारा का उच्चारण पूज्य मुनि श्री 108 नीरज सागर महाराज के श्री मुख से हुआ।
तलवंडी में होगा प्रवेश
मंगलवार की प्रातः बेला में पूज्य मुनि संघ का तलवंडी जिन मंदिर में मंगल प्रवेश होगा जहां श्री जी के अभिषेक के पश्चात आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के पूजन एवं मुनि संघ के मंगल प्रवचन होंगे।
सोमवार की मंगल बेला में मंगल प्रवचन देते हुए पूज्य मुनि श्री 108 नीरज सागर महाराज ने कहा कि ज्ञान लेना महत्वपूर्ण नहीं है अपितु उसे जीवन में उतारना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बेडी का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बेड़ी सोने की बनती है, जिसे चैन कहा जाता है। एक लोहे की बनती है जिसे जंजीर कहा जाता है। दोनों को तपाया जाता है। गर्म कर हथौड़े से पीटा जाता है। लोहे की बेड़ी से ज्यादा आवाज आती है। जबकि सोने की चैन बनाने में काम आवाज है। लोहे की पिटाई उसी के परिवार के लोहे से बनी होती है। जबकि सोने की चैन की पिटाई सोने की हथौड़ी से नहीं अपितु लोहे की हथौड़ी से होती है, जो भिन्न है। महाराज श्री ने कहा कि समाज में सक्रिय भूमिका अदा कर कार्य करना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
