जयपुर शहर में चार आर्यिका संघो के पावन सानिध्य में भट्टारक जी की नसियां जी मै
में चल रहे हैं 256 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे रोज आज 16 अर्घो द्वारा हुई भव्य पूजा

जयपुर/
परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी, आर्यिका रत्न 105 स्वस्ति भूषण माताजी तथा आर्यिका 105 भरतेश्वरीमती माताजी के साथ चार आर्यिकाओ ससंघ के पावन सानिध्य में श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर भट्टारक जी नसियां में गुरु भक्तो को मिला 256 मण्डलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान करने का पावन अवसर जैन समाज के मिडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा गोधा ने अवगत कराया कि अष्टान्हिका पर्व के आज दूसरे दिन की शुरुआत पर प्रातः जिनाभिषेक , शांतिधारा के बाद 16 अर्घो के द्वारा हुई त्रिलोक तिलक सिद्ध परमेंष्ठी की भव्य पूज्य अर्चना तत्पश्चात दिव्य देशना में पूज्य गुरु मां ने भक्ति की महिमा को बतलाते हुए कहा की सच्ची भक्ति ही तो हमको सच्चा भक्त बनाती हैं ,सच्चा भक्त बना करके भगवान भी बनाती हैं ,भगवान से साक्षात बात करने का माध्यम है भक्ति ,निधत्ति, निकांचित जैस बड़े बड़े कर्मो को काटने का साधन है भक्ति ,अतः सबको भक्ति करते हुए धर्म आराधना में तल्लीन रहते हुए जीवन को सफल बनाना चाहिए।
*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*
