समाजसेवी वयोवृद्ध स्वर्गीय श्री केवलचंद रावका की पुण्यतिथि पर नमन
रामगंज मंडी नगर के आधार स्तंभ में से एक श्रीमान केवलचंद रावका जो निश्चित रूप से अनुशासन प्रिय सिद्धांत प्रिय और हर कार्य को समय से करना उनके जीवन की प्रमुख विशेषता थी। इन्होंने अपने जीवन में सादा जीवन उच्च विचार को अपनाया ऐसे व्यक्तित्व को आज उनकी पुण्यतिथि पर स्मरण में लाना आवश्यक है उन्होंने समाज सेवा में भी अपना योगदान दिया से वे शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के भी महामंत्री के पद पर कार्यरत रहे और उन्होंने उसे भी बखूबी निभाया उनके मंत्री बनने के बाद समाज में हर कार्य समय से पूर्ण होते थे।
एकाग्रता तत्परता के प्रतीक
जीवन झूला है लेकिन समता तत्परता की डोर से सफ़लता मिलती है यह उदाहरण उनके जीवन से देखने को मिलता है। वे किशोरावस्था के अध्ययन काल में एकाग्रता और योग्यता से पढ़ाई करके प्रथम स्थान प्राप्त करते रहे। जब वह शिक्षक के रूप में रहे तभी उनके जीवन में







अध्यापन का कार्य सर्वश्रेष्ठ रहा। ऐसे व्यक्तित्व थे श्री रावका।
इतना ही नहीं वह राष्ट्र के प्रति एवं समाज के प्रति सजग़ रहे एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में भी रहे जिसे भी उन्होंने सक्रियता के साथ निभाया। उन्होंने धर्म का पालन करते हुए रात्रि भोजन से भी परहेज रखा संघ का कार्य नियमानुसार तत्परता से कुशल नेतृत्व के साथ निभाया पर वहा धर्म को नहीं छोड़ारात्रि कालीन भोजन से परहेज करते हुए संघ के शिविरों का संचालन तत्परता के साथ संचालित करते थे। इतना ही नहीं उन्हें आने वाली पीढ़ी के बच्चों के भविष्य की उज्जवलता के प्रति भी ध्यान था और उनके प्रति गहरा चिंतन एवं गहरी सोच थी इसी को लेकर उन्होंने विद्या भारती के दायित्व को बालकों के भविष्य की उज्जवलता के लिए कृत संकल्प करके निभाया। जिसका परिणाम वर्तमान में परीक्षित हो रहा है। वे संस्कारवान होकर वे बालक आज
उच्च पद में आसीन है। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के महामंत्री पद पर रहते हुए भी उन्होंने सक्रियता से कार्य किया मंदिर के कार्य को पूर्ण निष्ठा से सुनियोजित करने का प्रयास रहा समाज के प्रत्येक जनो को सम्मान दियासाधु साध्वियों का चतुर्मास हो या विद्वानों का आवागमन हो सबका पूरा प्रबंध करना उनकी दिनचर्या में मुख्य कार्य था।
वे प्रमाद आलस से कोसों दूर थे किसी भी कार्य को पूर्ण निष्ठा तत्परता लगन समर्पण के साथ पूरा किया थोड़ा सा भी प्रमाद नहीं था ऐसे व्यक्तित्व थे वे हम सभी के लिए आदर्श है। उनके व्यक्तित्व में व सिद्धांत पूर्ण रूप से सार्थक रूप दिखाता था कि समय कीमती है समय की पाबंदी कार्य की पूर्व योजना परिवार के समान सबके दुख दर्द का ध्यान रखना। उनका व्यक्तित्व था।
उनकी पुत्रवधू श्रीमती विभा रावका अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि मैं सोचती रही हमेश पापा को मेरा ख्याल नहीं रहता हैकिन्तु मेरी छोटी छोटी सी बात पर उनकी निगाह थी यह मुझे बहुत देर से समझ में आया। ऐसे व्यक्तित्व थे पुण्य स्मरण दिवस पर कोटि कोटि नमन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
