आचार्य श्री सुनीलसागर महाराज एवं स्वस्तिभूषण माताजी का हुआ स्वस्तिधाम पर हुआ ऐतिहासिक महामिलनआचार्य श्री ने मुनिसुवृतनाथ भगवान की प्रतिमा को एक टक निहारा।
स्वस्तिधाम जहाजपुर
सोमवार का पावन दिन स्वस्तिधाम तीर्थ पर अनुपम संयोग लेकर आया जी हा हफ्ते का प्रथम दिन सोमवार, तारीख 11 और आचार्य श्री सुनील सागर महाराज संघ का मंगल आगमन आज का यह मंगल आगमन इतिहास के पन्नों पर अविस्मरणीय हो गया।
सोमवार की बेला में क्षेत्र की कमेटी भी काफी उत्साहित नजर आ रही थी चारों ओर भक्ति उल्लास का वातावरण दिख रहा था दो महान संतों का महासमागम इस पुनीत क्षेत्र पर हो रहा था तो उत्साह तो बनता ही था। हर कोई बस इन पलों का साक्षी बनना चाह रहा था।

प्रातः की बेला में आचार्य श्री से दीक्षित शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 शुभम सागर जी महाराज एवं सक्षम सागर जी महाराज ने गुरु चरणों में शीश झुकाते हुए नमन किया जो शिष्य का गुरु के प्रति विनय भाव को दर्शा रहा था। जैनम जयतु शासनम वंदे सुनीलसागरम के जयकारों का शोर सुनाई दे रहा था।
उसके बाद द्वितीय अवसर था जब पूज्य गुरु मां भारत गौरव स्वस्ति धाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी का मंगल मिलन आचार्य श्री108 सुनील सागर जी महाराज से हुआ पूज्य गुरु मां ने जब आचार्य श्री के समक्ष नमन करते हुए उन्हें नमोस्तु निवेदित किया तो वह क्षण भी भाव विहल कर देने वाले परिलक्षित हो रहे थे हर कोई बस भाव भरी पलकों से दिव्य अलौकिक क्षणों को निहार रहा था। जैसे ही तीर्थ के प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री संघ सहित पहुंचे तो क्षेत्र कमेटी की ओर से आचार्य श्री की अगवानी मंगल आरती कर एवं पद प्रक्षालन कर की गई।
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज ने





अतिशयकारी भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा के समीप पहुंचकर दर्शन किए एवं प्रतिमा को एक टक निहारा काफी समय तक महाराज जी ने दिव्य अलौकिक प्रतिमा को देखा और गदगद हो गए आचार्य श्री संघ सानिध्य में ही भगवान का अभिषेक किया गया। एवं शांति धारा की गई शांति धारा करने का सौभाग्य कमलेश जैन जयपुर को मिला। एवम सुनील सागर युवा संघ अध्यक्ष विकास जैन के साथ सभी युवा संघ के सदस्यों ने अभिषेक किया एवं पुण्य अर्जन किया।
यदि हम पूर्व की स्मृति में जाएं तो वर्ष 2022 में माताजी का एवं आचार्य श्री का भट्टारक जी की नसिया में महा मिलन हुआ था तब भी वहा कल्पद्रम महामंडल विधान हो रहा था और आज भी वही क्षण देखने को मिले तब माताजी ने आचार्य श्री से निवेदन किया था कि आप एक बार इस अलौकिक तीर्थ पर पधारे और भगवान के दर्शन करें आज वह क्षण परिलक्षित होता दिखाई दिया।
इस अवसर पर माताजी ने आचार्य श्री के आगमन को बड़ा ही महत्व के कथन के साथ कहते हुए कहा कि आज बहुत ही पुण्य का संयोग है कि आचार्य गुरुवर का आगमन क्षेत्र पर हुआ है। यह हम लोगों का पुण्य है कि हमारे जीवन के काल में भगवान निकले
इस अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने अपने भाव प्रकट करते हुए पूज्य गुरु मां को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया एवं क्षेत्र की व्यवस्थाओं की भी सराहना की और भगवान की प्रतिमा को अलौकिक एवं ऊर्जावान बताया। और कहा कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ भगवान के काल में श्री राम का जन्म हुआ उन्होंने सभी से कहा कि आप लोगों के जितने भी मांगलिक कार्य हो वह सब क्षेत्र पर आकर करें इससे क्षेत्र का भी उद्धार होगा एवं आपके जीवन में धर्म वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यदि हम धर्म कार्य से जुड़ते हैं तो अनिष्ट होने से बचता है और हमारे कर्म की निर्जरा होती है।
निश्चित ग्रुप से हम कह सकते हैं कि आज का यह समागम महासमागम बन गया। और यही कहूंगा कि स्वस्तिधाम तीर्थ कई आयामों को छू रहा है लेकिन आज एक और अध्याय स्वस्तिधाम तीर्थ से जुड़ गया जो युगों युगों तक अंकित रहेगा। यदि हम कहें तो दोनों के नाम स से प्रारंभ होते हैं और स तो सर्व मंगलकारी है। आचार्य सुनील सागर महाराज तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज से दीक्षित हैं। और एक एक महान साधिका
जिनकी प्रेरणा से एक क्षेत्र बनकर तैयार हुआ है जो जैन धरोहर के रूप में कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है। और उनका नाम भी स से शुरू होता है। स्वस्ति स्वस्ति का अर्थ मंगलकारी और जहां हो स्वस्तिभूषण माताजी वहा तो हर कार्य ही होगा मंगलकारी। निश्चित रूप से आज जिन्होंने भी यह क्षण साक्षात रूप में देखे हैं वह निश्चित ही अनंत ऊर्जा से भरे होंगे। क्योंकि यह तीर्थ ऊर्जा से भरा हुआ है और अद्वितीय परिकल्पना का एक साकार रूप है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
