युगल मुनिश्री अमोघ कीर्ति एवं अमर कीर्ति के वह शब्द की विवाह सादगी और दो परिवार का मिलन है ना की शोर शराबा और दिखावेका को सार्थक करते हुए हुआ एक आदर्श विवाह
आज के दौर में दिखावा एवं प्रदर्शन एवं लोक लाज चरम सीमा पर है ऐसे में लोग क्या कहेंगे इसको देखते हुए लोग प्रदर्शन पर शादी ब्याह एवं अन्य समारोह दिखावे पर फिजूल खर्ची करते हैं जिसके दूरगामी परिणाम घातक होते हैं।
इसके विपरीत इन सब को छोड़ते हुएदिनांक 7.11.2024 को श्री पंकज जयचंदजी पाटणी ,सौ कल्पना पंकजजी पाटणी इनके सुपुत्र नयन और बहू सौ अवनी सुपुत्री श्री संदेश ऋषभ कुमार गंगवाल ,सौ डॉक्टर स्वेतल संदेशज गंगवाल का विवाह गजपंथा सिद्धक्षेत्र मंदिर परिसर में सादगी और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।


यह विवाह 15 एवं 16 फरवरी को होटल ताज में बड़े ही धूमधाम से होने वाला था परंतु युगल मुनि श्री अमोघ कीर्ति एवं अमर कीर्ति जी के वह शब्द की विवाह सादगी और दो परिवार का मिलन है ना की शोर शराबा और दिखावेका आज कल तो बड़े बड़े विवाह समारोह कराने की आपसी ओढ़ लगी है इसे कही ना कही तो रोकना चाहिए बस यही बात दोनों परिवारों के दिल को छू गई। और एक प्रेरणादायक उदाहरण समाज के लिए बन गई
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गुरुदेव की प्रेरणा पाकर और उनके संबोधन को साकार रूप देते हुएदिनांक 6/11/2024 को दोनों मुनिराजो को आहार देने गये हुए दोनों परिवारों ने आहार देने के उपरांत गुरुदेव के कहे हुए वचनों को सार्थक रूप दिया।दिनांक 07/11/2024 को विवाह संपन्न करकर समाज के लिए एक नया आयाम एवं एक आदर्श स्थापित किया।
अनुपम उदाहरण एवं सीख
इस विवाह ने हमें सिखाया कि खुशियाँ केवल बड़े समारोहों में ही नहीं, बल्कि सरलता और निकटता में भी पाई जा सकती हैं। यह पल हम सभी को यह स्मृति बताता है कि रिश्तों का असली मोल प्यार और आपसी समझ में है, न कि भीड़भाड़ में। इस नए जोड़े का जीवन इसी सादगी और प्यार से भरपूर हो।
आज समाज में जो बड़े बड़े विवाह समारोह करते हुए एक दूसरे से स्पर्धा करने कि जो रूढ़िया बनती जा रही है उसे कही ना कही रुकना ज़रूरी है । जहां करोड़ों रुपये खर्च कर विवाह होने वाला था वह सादगी के साथ कितना अच्छा हो सकता है कितनी विधि विधान के साथ हो सकता है इसका उदाहरण आज दोनों ही परिवार ने समाज में प्रस्तुत किया है।
क्या हम भी इससे सीख लेंगे
क्या हम भी इस विवाह समारोह से सीख लेकर इसी तरह से सादगी पूर्ण कार्य करने की ओर अग्रसर होंगे एवं आडंबर दिखावा को पृथक रखकर कार्य करेंगे यदि इस समारोह को देख हम सभी भी इस तरह के कार्य की ओर अग्रसर होंगे तो निश्चित रूप से समाज एवं देश का विकास चरम पर होगा। इसे हम आर्थिक सामाजिक एवं पारिवारिक दृष्टि से भी देखें तो इस तरह की पहल दूरगामी परिणाम एवं सार्थक परिणाम देने वाला होता है। इसमें होने वाला कितना व्यर्थ व्यय बच जाता है और आने वाली पीढ़ी की शिक्षा एवं परवरिश में दिखावे से बची राशि काम में आ सकती ती है और उनसे उनका भविष्य उन्नत बन सकता है। मैं सभी युवा पीढ़ी को भी यही कहना चाहूंगा कि इस तरह की पहल की अनुमोदना करनी चाहिए और युवा पीढ़ी को भी सबक लेकर दिखावा आडंबर से हटकर कार्य करने की ओर अग्रसर होना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
