प्रणम्य सागर महाराज सानिध्य में अवदान विषयक संगोष्ठी में आचार्य विद्यासागर महाराज के भारतीय संस्कृति के संवर्धन में योगदान पर विद्वानों ने पढ़े अपने आलेख
जयपुर
महावीर नगर में मुनि श्री प्रणम्यसागर महाराज सानिध्य में अवदान विषयक संगोष्ठी के द्वितीय दिन भारतीय संस्कृति के संवर्धन में योगदान पर कई विद्वानों ने अपने आलेख पढ़े।
अर्हम ध्यान योग प्रणेता प्रणम्यसागर महाराजा सानिध्य में अवधान विषयक संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है
इस संगोष्ठी के विषय में अध्यक्ष अनिल जैन एवं मंत्री सुशील बज ने बताया कि संगोष्ठी का प्रथम सत्र प्राचार्य शीतल प्रसाद की अध्यक्षता में प्रातः प्रारंभ हुआ। जिसमें कुंडलपुर से आए अमित भैया ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में हस्तकरधा उद्योग क्रांति के योगदान पर अपना आलेख पढ़ते हुए कहा की आचार्य श्री अर्थ का मतलब समझाते हुए कहते थे कि प्रतिभा और प्रतिभावान लोग ही वास्तविक अर्थ है। जहां प्रतिभा का संकलन होता है वहां उन्नति अपने आप आ जाती है।
दूसरे वक्ता के रूप में डॉक्टर सोनम शास्त्री ने काव्यशास्त्र दृष्टि में






मूकमाटी मीमांसा विषय पर अपना आलेख पढ़ते हुए कहा कि साहित्य वही है जो हित के सहित हो। डाक्टर श्रेयांश कुमार ने अपने आलेख में कहा कि शुद्ध उपयोग कभी अविरत नहीं हो सकता। यह शुद्ध उपयोग मुनि अवस्था में ही होता है। आचार्य श्री कहते थे की क्षमता का भाव छूटेगा तो श्रमणता भी टूट जाएगी।
डॉ शीतल प्रसाद ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। इस संगोष्ठी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर फूलचंद शास्त्री सहित पूरे देश से अनेक विद्वान पधारे हैं। सभा का संचालन प्रोफेसर अनेकांत जैन ने किया। इससे पूर्व समाजश्रेष्ठी शीतल निर्मला, अनमोल कटारिया ने चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पद प्रक्षालन, एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्राप्त किया।
इस अवसर पर महाराज श्री ने कहा कि द्रव्य के कारण जो उपयोग होता है वह अशुद्ध उपयोग होता है। क्योंकि जहा कषाय, राग और मोह साथ साथ में है। वहां नियम से अशुद्धोपयोग होगा। दर्शन मोहनिया एवं चरित्र मोहनिया के क्षयोपशम से शुभ उपयोग होता है यह शुभ उपयोग मार्ग प्रशस्त करता है जो 12वे गुणस्थान में होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
