जिसके हृदय में प्रभु होते है उनको संसार में किसी भी शक्ति का कोई भय नहीं होता” प्रमाणसागर महाराज

धर्म

जिसके हृदय में प्रभु होते है उनको संसार में किसी भी शक्ति का कोई भय नहीं होता” प्रमाणसागर महाराज
इंदौर
संकट के समय में भगवान की भक्ती से बड़ा और कोई दूसरा उपाय नहीं होता जिसके हृदय में प्रभु होते है उनको संसार में किसी भी शक्ति का कोई भय नहीं होता” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने भक्तामर स्त्रोत्र के 48 काव्य पूर्ण करते हुये व्यक्त किये।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि दुनिया में दो तरह के लोग होते है एक- जिनके पास सत्ता तथा शक्ती होती है,ऐसे लोग पदार्थवादी कहलाते है, तथा दूसरी और वह लोग होते है जिनके पास एक मात्र सहारा भगवान की भक्ती होती है और वह किसी भी परिस्थिति में भगवान के प्रति अपनी आस्था और भक्ती को डिगने नहीं देता तथा बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी पार कर जाता है, सातवी शताब्दी में सत्ता और शक्ती के अहंकार से पूरित राजा भोज ने आचार्य मानतुंग को 48 अंधेरे कमरों बंद कर ऊपर से ताले लगा दिये इन विकट परिस्थितियों में आचार्य मानतुंग ने भगवान के प्रति भक्ती का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया और प्रतिकूल संयोग में वह विचलित नहीं हुये और प्रभु भक्ती में ऐसे डूबे की उनके स्वर गूंज उठे और एक एक करके सारे बंधन टूटते चले गये और वह 47 तालों के बंधन से मुक्त हो गये सारे दरबारी और राजा भोज भी उनकीभक्ती से प्रभावित और आश्चर्य चकित थे।

 

जब मात्र एक ताला बचा था तो उन्होंने राजा भोज से कहा कि आपके पास तो इतने दरबारी है सभी मिलकर इस एक ताला को अपनी भक्ती से खोल दें?तो राजा भोज और सभी दरबारी आचार्य मानतुंग के समक्ष शरणागत होते हुये अपने अपराध की क्षमा मांगी आचार्य मानतुंग 48 वे काव्य मेंप्रभु से कहते है कि”स्तोत्र-स्रजं तव जिनेन्द्र,गुणैर्निबद्धाम्,भक्त्यामया,विविध-वर्ण-विचित्र-पुष्पाम् धत्ते जनो य इह कण्ठ-गता-मजस्रं,तं मानतुंग-मवशा-समुपैति लक्ष्मी:”

 

मुनि श्री ने कहा कि आचार्य मानतुंग कि अक्षर और व्यंजन से युक्त यह भक्ती माला जिसे उन्होंने अपने स्वरों से गूंथा है इस माला को जो भी व्यक्ती कंठस्थ कर अपने गले में धारण करेगा उसके पास से भय भी भयातीत होकर भाग जाएगा। मुनि श्री ने कहा कि जिसका भगवान के प्रति श्रद्धान पक्का होता है,उन्ही के जीवन में यह उपलब्धि हासिल होती है “संकट के समय में आपके पास भगवान की भक्ती से बड़ा और दूसरा कोई उपाय नहीं है” जब कभी भी आप किसी संकट में आ जाए तो आपके पास और कोई रास्ता न दिखाई दे तो आप “णमोकार महामंत्र” तथा “भक्तामर स्त्रोत्र” का चिंतवन कीजिएगा इसका स्तवन आपको सभी संकटों से पार लगाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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