श्रावकों को साधुओं के साथ मध्यस्थ भाव रखकर सेवा करनी चाहिए प्रज्ञा सागर महाराज आचार्य श्री के सानिध्य में कल्याण मंदिर विधान हुआसंपन्न

धर्म

श्रावकों को साधुओं के साथ मध्यस्थ भाव रखकर सेवा करनी चाहिए प्रज्ञा सागर महाराज आचार्य श्री के सानिध्य में कल्याण मंदिर विधान हुआसंपन्न
झालरापाटन
बुधवार की अनुपम बेला में दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र जूनी नसिया में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज सानिध्य में कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान संपन्न हुआ। इस विधान में सभी धर्म प्रेमी बंधुओ ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।

 

 

आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में साधुओं के साथश्रा वकों को मध्यस्थ भाव रखने की बात पर जोर दिया उन्होंने कहा कि हमें मध्यस्थ भाव रखना चाहिए। श्रावक को समस्त साधुओं के साथ मध्यस्थ भाव रखकर सेवा करनी चाहिए। यदि कोई छोटा साधु बड़े साधु को नमोस्तु करता है तो इसमें छोटे साधु का ही बड़प्पन है।

एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने कहा कि एक तरह से दूध में पानी का विलय माना जाता है यदि आप मध्यस्थ भावना नहीं रखोगे, अहंकार रखोगे तो श्रावक भटक जाएगा और वह एक दिन अपने धर्म से विमुख होकर विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां पैदा कर लेगा।

महाराज श्री के सानिध्य में महामंडल विधान की क्रियाएं विधि विधान एवं मंत्र उच्चारणके साथ संपन्न हुई जिसका कुशल संचालन राजकुमार जैन बैंक वालों ने किया संगीत की स्वर लहरिया वेदांत सावला ने बिखेरी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *