गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी के 53 वे दीक्षा दिवस पर भाव भीनी विनयांजलि
आया है पावन दिन भक्ति की और
दीक्षा जयंती पर भक्तो का है शोर
अपनी आत्म सधना रहती लीनी
पापो से लडती है आगम पर चलती है
मेरी गुरु मा जग मे कोई नहीं
एक परिचय गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी
गणिनी गुरु माँ की साधना सचमुच अद्भुत है माताजी स्वयं के लिए कठोर है नियम साधना सदा अडिग है।उनके तप त्याग पर यदि हम नज़र डाले तो यह प्रतीत होता है इन्हे शरीर से ममत्व नहीं है बस आत्म कल्याण की और बढना है। गणिनी माताजी सिर्फ12ग्रास ही ग्रहण करती। माताजी स्वयं तो अपनी साधना तो करती है लेकिन अपनी शिष्याओं के प्रति पूर्ण ध्यान देती है। उनकी एक विशेष बात है जो सभी को अपनी और आकर्षित करती है। जब तक संघ में शामिल समस्त माताजी का आहार पूर्ण नहीं होता,तब तक वह स्वयम भी आहार नहीं लेती है। इतना ही नहीं यदि उनके त्याग की और नज़र डाले तो हर कौई भाव विहल हो सकता है। उनके मीठे, तेल और घी का त्याग है।
गणिनी माताजी की साधना का क्या वर्णन करे शब्द भी बोने साबित होते है। उनके संयम दीक्षा के 53 वर्ष पूर्ण हुए। संयम की साधना कोई बच्चो का खेल नहीं है। सर्दी,गर्मी,बरसात,का उष्ण, परीषह को सहना सहन करना होता है। सचमुच यह निष्काम साधना है।
महज 4 वर्ष की उम्र मे कंदमूल का त्याग
जिनका जीवन बचपन से त्याग की और है वह एक महान मोती बनकर उभरता है, ऐसा ही गणिनी गुरु माँ के जीवन मे परीलक्षित है। महज 4वर्ष कीअल्प उम्र गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी की आर्यिका दीक्षा 1970 में गिरनार गोरव आचार्य श्री निर्मल सागर जी महाराज द्वारा हुई। वर्ष 1949 ग्वालियर लश्करी मे जन्मी माया जो बाद मे एक महान साधिका विशुद्धमति माताजी के रूप मे हुई, महज 4 वर्ष की अल्प आयु मे कंदमूल का त्याग कर दिया था।
संस्मरण
गणिनी गुरु माँ से जुड़ा संस्मरणों को आप सभी से साँझा कर रहा हु
भक्तो की भावना को जल्द पढ़ लेती है
गणिनी गुरु माँ यदि नज़र डाले तो वो भक्तो की भावना को जल्द पढ लेती है। वर्ष 2009 का वर्षायोग का समय निकट था माताजी का वर्षायोग कोटा होना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन रामगंजमंडी नगर की महिला शक्ति की भावना प्रबल थी। वह झिरनिया चोकी गणिनी गुरु माँ के चरणों मे निवेदन किया गुरु माँ तो भावनाओं को पढ लेती है,और उन्होने रामगंजमंडी नगर की भक्ति को जान लिया और वर्षायोग 2009 रामगंजमंडी मे हुआ जो एक इतिहास लिख गया।
हम तो यही कामना करते है आपका रत्नत्रय और बलवती हो
गुरु माँ के चरणों मे कोटि कोटि वन्दामी
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
