आचार्य शांति सागर महाराज ने जीवन के 27 वर्षों में 9938 उपवास किए थे उनके जीवन में महत्व उपवास की क्षमता ग्रस्त जीवन से जुड़ी हुई थी सुप्रभ सागर महाराज
नीमच
पूज्य मुनि श्री 108 वैराग्य सागर महाराज एवं पूज्य मुनि श्री सुप्रभ सागर महाराज सानिध्य में आचार्य शांति सागर महामंडल विधान हुआ इसी संदर्भ में परिचर्चा भी हुई।
उनके जीवन कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए सुप्रभ महाराज ने कहा कि आचार्य शांति सागर महाराज ने जीवन के 27 वर्षों में 9938 उपवास किए थे उनके जीवन में व्रत व उपवास की क्षमता ग्रस्त जीवन से जुड़ी हुई थी। त्याग का क्रम उन्होंने घर से ही शुरू कर दिया था।

मुनि श्री वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि आत्मा में लीन होना, भक्ति करना मानसिक जाप होता है। आत्मा में स्थिर होना ही उपवास होता है। तपस्या करने के बाद दान करते हैं तो वह कल्याणकारी होता है। इस अवसर पर ब्रह्मचारी मनीष शास्त्री ने कहा कि शांति सागर जी महाराज ने सफाई कर्मचारियों के उत्थान के लिए भी प्रेरणा दी थी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
