मुनिश्री शुभक्रिया सागर जी महाराज का सलेखना पूर्वक समाधी मरण- कामां नगर के लिए गौरव का क्षण*

धर्म

मुनिश्री शुभक्रिया सागर जी महाराज का सलेखना पूर्वक समाधी मरण- कामां नगर के लिए गौरव का क्षण*
कामां
जैन दर्शन मे समाधी मरण का बहुत ही महत्व बताया है। जैन आगम पर आधारित उल्लेखों के आधार पर जैन आचार्य भगवंत समाधि का महत्व बताते हुए कहते हैं कि प्रत्येक श्रावक को समाधि मरण की भावना भानी चाहिए, जैसे हमारे भाव होते हैं वैसी ही भावना भाई जाती है और जैसी भावना होती है वैसे ही परिणति होती है।

 

समाधि मरण की विशेष व्याख्या करते हुए आचार्य भगवंत कहते हैं की समाधि मरण बड़ा ही दुर्लभ है समाधि मरण के लिए बहुत ही पुण्य की आवश्यकता होती है कहते हैं कि कई जन्मों के संचित पुण्य से ऐसा संभव हो पाता है।

कामां के संजय जैन सर्राफ एवम श्री संजय जैन बड़जात्या ने बताया कि आज कामां नगर एवम जैन समाज के लिए बहुत ही गौरव का क्षण है कि कामां के ही मूल निवासी श्री हजारीलाल जैन जो कि दिल्ली प्रवास रत थे इनके छोटे पुत्र स्व : जवाहर जैन का परिवार कामां में ही जीवन यापन कर रहे है। उन्होंने अपने अंत समय जान आचार्य श्री 108सौभाग्य सागर महाराज के सानिध्य में समाधि मरण की भावना भाई,

इनकी दृढ़ता एवं निर्मल परिणाम को पहचानते हुए आचार्य श्री ने इनकी पवित्र भावना अनुसार इनको उत्कृष्ट श्रावक बनाते हुए क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की।

एवम आज सुप्रभात की मंगल बेला में मुनि दीक्षा प्रदान की और नामकरण करते हुए मुनिश्री 108शुभक्रिया सागर जी महाराज किया।
एक परिचय
श्रीमान मोतीलाल जैन के सुपुत्र हजारीलाल जैन (मुनि शुभक्रिया सागर जी महाराज ) का जन्म अतिशय क्षेत्र धर्म नगरी कामां में हुआ लाल दरवाजा कामां पर कपडे का व्यवसाय करते थे। इनमे धर्म के संस्कार तो बचपन में ही पड़ गए थे। जब इनके परिवार द्वारा शान्तिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी कामां में पार्श्वनाथ भगवान कि प्रतिमा वेदी में विराजमान करवाई थी, तबसे इनमे स्वाध्याय के प्रति गहरी रूचि थी।

 

और जब भी कामां में कोई साधु संत आता तो यह उनकी आहार चर्या पश्चात् ही स्वयं भोजन ग्रहण करते थे। इतना विशिष्ट इनका जीवन था। और तो और हम इसे संयोग ही कहेंगे वर्तमान में इनकी बड़ी पुत्रबधु आचार्य श्री 108सौभाग्य सागर महाराज के संघ में क्षुल्लिका के रूप में है। जिनकी आगामी 17 ता. को आर्यिका दीक्षा होने की संभावना है।

निश्चित रूप से इन्होंने मुनि दीक्षा धारण कर उत्कृष्ट समाधी मरण किया है।आज समस्त अगोनिया परिवार व सकल जैन समाज कामां गौरवान्वित है। इनके सल्लेखना पूर्वकसमाधी मरण कि हम बहुत बहुत अनुमोदना करते हैं व भावना भाते हैं कि आप शीघ्र ही इस भव बंधन को परास्त कर मोक्ष पद को प्राप्त करें।
संजय जैन सर्राफ एवम संजय जैन बड़जात्या कामां से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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